चुनाव आयोग पर उठे गंभीर सवाल, कांग्रेस ने पीएम मोदी को घेरा
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कार्यों और निर्णयों को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग की भूमिका संदिग्ध लग रही थी, और जब हमने सवाल उठाए, तो उन्हें मजाक में लिया गया। आयोग के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।
खरगे ने आगे कहा कि आज चुनाव आयोग के भीतर से वही बातें सामने आई हैं। तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की हैं। फॉर्म 6 का दुरुपयोग, सॉफ़्टवेयर का गलत इस्तेमाल, वोटर लिस्टों में हेरफेर, और बिना पारदर्शिता के निर्णय जैसे मुद्दे अब सबके सामने हैं। फिर CEC ज्ञानेश कुमार ने इन आपत्तियों पर क्या कदम उठाए?
पिछले कई वर्षों से काँग्रेस पार्टी और कई विपक्षी दल देश में होने वाले चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। हमें लगातार चुनाव आयोग की भूमिका संदिग्ध नज़र आ रही थी। जब हमने सवाल उठाया तो उसे मज़ाक़ में उड़ा दिया गया। आयोग के दरवाज़े बंद कर दिए गए।
आज चुनाव आयोग के भीतर से…
— Mallikarjun Kharge (@kharge) September 23, 2026
राहुल गांधी ने जिस 'Vote Chori' और SIR का लगातार जिक्र किया, आज वे सवाल सही साबित हो रहे हैं। यह लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है। 24 अप्रैल 2026 को 73 विपक्षी राज्यसभा सांसदों ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नया नोटिस सौंपा था। संसद का मानसून सत्र अभी तक स्थगित नहीं हुआ है। क्या राज्यसभा के सभापति अब उस लंबित नोटिस पर निर्णय लेंगे?
आज सवाल केवल 'Vote Chori' का नहीं है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं पर सरकार के नियंत्रण का भी है। चुनाव आयोग के भीतर से आए दस्तावेज मोदी सरकार और भाजपा-RSS की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देना होगा। लोकतंत्र को छीनने की कोशिश करने वालों को उचित जवाब दिया जाएगा।