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चुनाव आयोग में Form 6 को लेकर उठी आपत्तियों की जानकारी

चुनाव आयोग में नए मतदाताओं के लिए Form 6 को लेकर उठी आपत्तियों की जानकारी सामने आई है। दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग की प्रक्रियाओं पर 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की हैं। इनमें Form 6 में बदलाव, मतदाता सूची डेटाबेस की पहुंच और IT प्रणाली से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इस रिपोर्ट में आयोग की प्रतिक्रिया और इन आपत्तियों की वैधानिक प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके चुनावी प्रक्रिया पर प्रभाव के बारे में।
 

नई दिल्ली में चुनाव आयोग की आपत्तियों का खुलासा

नई दिल्ली। नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए उपयोग किए जाने वाले 'Form 6' के संबंध में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज की गई आपत्तियों का विवरण सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के दो आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग की प्रक्रियाओं और निर्णयों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन आपत्तियों का संबंध Form 6 में संशोधन, नए मतदाताओं का पंजीकरण, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची डेटाबेस और चुनाव आयोग की IT प्रणाली तक अधिकारियों की पहुंच से संबंधित मुद्दों से था। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।


Form 6 में बदलाव पर विवाद

Form 6 का उपयोग नए मतदाताओं के नाम को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत निर्वाचन आयोग के ECINet पोर्टल पर उपलब्ध Form 6 में SIR से संबंधित एक नया प्रश्न जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से पूछा गया कि क्या उनका नाम पिछली SIR की वोटर लिस्ट में था, क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में था, या इनमें से किसी का भी नाम उस सूची में नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, इस जानकारी वाले हिस्से को अनिवार्य नहीं बताया गया था, लेकिन बिना उत्तर दिए आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा था।


आपत्तियों का समर्थन

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में Form 6 में किए जा रहे बदलाव पर सवाल उठाया था। उनका कहना था कि Form 6 एक वैधानिक दस्तावेज है और इसमें बदलाव के लिए मतदाताओं के पंजीकरण के नियमों में संशोधन की आवश्यकता होगी। इसके बाद, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति का समर्थन किया। संधू ने इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे हटाने और मूल Form 6 को बहाल करने की मांग की।


मतदाता सूची डेटाबेस पर चिंताएं

दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची डेटाबेस की पहुंच और उसके केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता व्यक्त की। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव पंजीकरण अधिकारियों की चुनावी डेटाबेस तक पहुंच और केंद्रीय IT प्रणाली में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए गए। विवेक जोशी ने डेटाबेस की पहुंच की अंकेक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि संधू ने राज्य स्तर के अधिकारियों को डेटाबेस का पूरा एक्सेस न मिलने से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख किया।


IT प्रणाली पर उठे सवाल

रिपोर्ट में चुनाव आयोग की IT के महानिदेशक सीमा खन्ना का भी उल्लेख है। संधू ने सवाल उठाया कि क्या IT विभाग के पास कानूनी चुनाव प्राधिकरण की डेटाबेस एक्सेस को सीमित करने का अधिकार है। इसके अलावा, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के IT इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्यों के बंटवारे में बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र लिखे थे।


पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया का मामला

मामला पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया तक भी पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, संधू ने उन मतदाताओं के खिलाफ दाखिल अपील को लेकर सवाल उठाया, जिन्हें न्यायिक अधिकारी ने निर्वाचक नामावली में शामिल किया था। उन्होंने पूछा कि इन अपीलों को चुनाव आयोग की ओर से दाखिल करने के लिए किसने अनुमति दी और इन्हें वास्तव में किसने दाखिल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, संधू ने कहा कि उन्हें, विवेक जोशी और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस प्रक्रिया के आधार के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी।


गोवा में 97 वोटरों से जुड़ा मामला

रिपोर्ट में गोवा का एक सॉफ्टवेयर से संबंधित मामला भी सामने आया है। इसके मुताबिक, 97 योग्य मतदाता से संबंधित पात्रता संबंधी निर्णय डिजिटल सिस्टम में समय पर दर्ज नहीं हो सके। इसके चलते इन मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए।


भारत निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया

इन आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि आयुक्तों के बीच लिखित टिप्पणियाँ, प्रश्न और सुझाव निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। भारतीय चुनाव आयोग के अनुसार, SIR समेत आयोग के सभी महत्वपूर्ण अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर आपत्तियां और सुझाव दर्ज होना अलग बात है, जबकि अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए। मौजूदा तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी शामिल हैं।


महत्वपूर्णता का विश्लेषण

Form 6 नए मतदाताओं को निर्वाचक नामावली में शामिल करने की प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में इसमें किए गए बदलाव, SIR से संबंधित जानकारी और चुनावी डेटाबेस तक अधिकारियों की पहुंच जैसे मुद्दे चुनावी प्रक्रिया की कार्यप्रणाली के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान में सामने आई रिपोर्ट में एक तरफ दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियां हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत निर्वाचन आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। अब इन आपत्तियों पर हुई कार्रवाई और Form 6 में बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया को लेकर सामने आने वाली जानकारी पर नजर रहेगी।