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चेन्नई में कचरा प्रबंधन के लिए चार श्रेणियों में बंटवारा अनिवार्य

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने शहर में कचरे के प्रबंधन के लिए चार श्रेणियों में बंटवारे को अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सभी नागरिकों और संस्थानों पर लागू होगा, जिसमें जुर्माने का प्रावधान भी है। जानें इस नई पहल के बारे में और कैसे यह चेन्नई के कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाएगा।
 

कचरा प्रबंधन में नई पहल

चेन्नई: ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने शहर में कचरे को उसके स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ करना और लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा को कम करना है।


यह नियम सभी नागरिकों, अपार्टमेंट्स, दुकानों, व्यावसायिक संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और बड़े कचरा उत्पादकों पर लागू होगा। निगम ने चेतावनी दी है कि यदि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 का पालन नहीं किया गया, तो जुर्माना और नगरपालिका कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।


निवासियों और संस्थानों को कचरा संग्रहण के लिए आने वाले सफाई कर्मचारियों को सौंपने से पहले इसे चार श्रेणियों में बांटना होगा।


गीले कचरे के लिए हरे डिब्बे का उपयोग किया जाएगा, जबकि कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच और अन्य रिसाइक्लेबल सूखे कचरे के लिए नीले डिब्बे का इस्तेमाल होगा।


सैनिटरी कचरे, जिसमें इस्तेमाल किए गए डायपर और सैनिटरी नैपकिन शामिल हैं, को लाल डिब्बे में सुरक्षित तरीके से डालना होगा।


घरेलू खतरनाक कचरे, जैसे बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, एक्सपायर्ड दवाएं और रासायनिक पदार्थों के लिए काले डिब्बे का उपयोग किया जाएगा।


अलग किए गए कचरे को ले जाने के लिए डोर-टू-डोर संग्रहण में बैटरी चालित वाहनों में चार रंगों के कंटेनर लगाए गए हैं। सभी 200 वार्डों के सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे केवल वही कचरा लें जो सही तरीके से अलग किया गया हो।


यह आदेश दक्षिणी चेन्नई में एक जागरूकता अभियान के बाद आया है। 22 अगस्त को जीसीसी ने 40 दिन का 'सेग्रिगेट वेस्ट - सेव टुमॉरो' अभियान शुरू किया था, जिसमें घर-घर जाकर लोगों को कचरे को अलग करने के महत्व के बारे में बताया गया। प्रारंभिक चरण में पांच जोन के हर जोन में 1,000 घरों को कवर किया गया। इसमें शामिल परिवारों को नॉन-बायोडिग्रेडेबल कचरा अलग रखने के लिए बैग भी दिए गए। निगम की योजना धीरे-धीरे इस अभियान को पांचों जोन के 50,000 घरों तक पहुंचाने की है।


अधिकारियों का कहना है कि घर और संस्थान स्तर पर सही बंटवारे से रिसाइक्लेबल सामग्री को बेहतर तरीके से निकाला जा सकेगा, सड़ने वाले कचरे से खाद बनाना आसान होगा और आगे की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। इससे चेन्नई के डंपिंग ग्राउंड पर बोझ कम होगा और रिसाइक्लेबल तथा खतरनाक कचरा सामान्य कचरे में मिलने से बचेगा।


जीसीसी ने नागरिकों, संस्थानों और व्यापारियों से सफाई कर्मचारियों का सहयोग करने और रंग-कोड वाले सिस्टम का पालन करने की अपील की है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई की जा सकती है।