छात्र आंदोलन में कॉकरोच जनता पार्टी का संगठनात्मक संकट
कॉकरोच जनता पार्टी का सामना संगठनात्मक संकट
NEET और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पहली बार एक बड़े संगठनात्मक संकट का सामना कर रही है। सोशल मीडिया पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन अब हजारों छात्रों की आवाज बन चुका है, लेकिन इसके शीर्ष नेतृत्व में मतभेद स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आ गए हैं।
संसद मार्च के दौरान एक विवादास्पद वीडियो ने संगठन में हलचल मचा दी, जिसके कारण पार्टी को अपने प्रमुख चेहरे के खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता पड़ी।
डिजिटल व्यंग्य से शुरू हुआ आंदोलन
CJP की शुरुआत महाराष्ट्र के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पैरोडी अकाउंट के माध्यम से की थी। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना था। धीरे-धीरे, इस अभियान में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार और युवा नेता शामिल हो गए। सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे नाम संगठन की रणनीति और संवाद के प्रमुख चेहरे बनकर उभरे।
इस दौरान हरियाणा के युवा नेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विजेता दहिया भी इस आंदोलन से जुड़े। उनकी लोकप्रियता और आक्रामक शैली के कारण उन्हें जल्द ही CJP का प्रमुख प्रवक्ता बना दिया गया। 21 जुलाई 2026 को CJP ने 'चलो संसद मार्च' का आह्वान किया। जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को रोकने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया।
संसद मार्च के दौरान बढ़ा विवाद
इस हंगामे के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें विजेता दहिया एक मॉल में बर्गर खाते हुए दिखाई दिए। यह वीडियो उस समय सामने आया जब प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई का सामना कर रहे थे। वीडियो वायरल होने के बाद कई छात्रों और समर्थकों ने इसे आंदोलन की भावना के खिलाफ बताते हुए नाराजगी व्यक्त की।
वीडियो पर सफाई देने के बजाय, विजेता दहिया ने एक और वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि लंबे समय तक काम करने के बाद भोजन करना गलत नहीं है। हालांकि, उनका यह बयान विवाद को शांत करने के बजाय और बढ़ा गया। सोशल मीडिया पर इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं और संगठन के भीतर भी असहमति बढ़ गई।
नेतृत्व ने लिया सख्त फैसला
विवाद बढ़ने के बाद, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। इसमें विजेता दहिया को मुख्य प्रवक्ता पद और प्राथमिक सदस्यता से तुरंत प्रभाव से हटाने की घोषणा की गई। संगठन ने कहा कि छात्र आंदोलन त्याग और संघर्ष पर आधारित है और किसी भी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से संवेदनशील और जवाबदेह व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। इसके साथ ही, अभिजीत दिपके ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में संसद मार्च जैसे कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। उनका कहना था कि संगठन छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और उन्हें अनावश्यक हिंसा या पुलिस कार्रवाई के जोखिम में नहीं डालना चाहता। इस घटनाक्रम ने CJP के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखने की नई चुनौती खड़ी कर दी है।