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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की वर्षगांठ: सुरक्षा व्यवस्था में बढ़ोतरी और विकास की चर्चा

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटने की सातवीं वर्षगांठ पर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की है और विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगा दी है। इस अवसर पर विकास गतिविधियों और राज्य के दर्जे पर भी चर्चा हो रही है। जानें इस महत्वपूर्ण दिन पर क्या हो रहा है और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों के बारे में।
 

सुरक्षा के कड़े इंतजाम


नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटने की सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षाबलों की संख्या बढ़ाई गई है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय किए हैं।


सुरक्षा जांच का व्यापक अभियान

हाईवे और संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी


सुरक्षा एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में आने-जाने वाले वाहनों और व्यक्तियों की निरंतर जांच कर रही हैं। रामबन में CRPF ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सुरक्षा जांच अभियान चलाया है। कुलगाम पुलिस ने NH-44 पर वाहनों की चेकिंग और पहचान पत्रों की जांच को भी तेज कर दिया है। सीमा से सटे क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को सतर्क रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है।


प्रदर्शन पर रोक

विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं


प्रशासन ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन या रैलियों की अनुमति नहीं दी है। सुरक्षा एजेंसियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित व्यवधानों को रोकने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर सुरक्षा को बढ़ाया गया है।


अनुच्छेद 370 का इतिहास

2019 में अनुच्छेद 370 का हटना


5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया।


उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव पेश किया था। सरकार ने इसे जम्मू-कश्मीर के विकास और देश के साथ पूर्ण एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया था।


विकास की दिशा में कदम

राज्य का दर्जा और विकास की चर्चा


बीजेपी सांसद गुलाम अली खटाना ने अनुच्छेद 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में पर्यटन और विकास गतिविधियों में वृद्धि का दावा किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लोगों का विश्वास बढ़ा है और कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।


वहीं, शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने जम्मू-कश्मीर को जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की है। उनका कहना है कि राज्य का दर्जा मिलने से क्षेत्र में विकास की गति और तेज हो सकती है। सातवीं वर्षगांठ के अवसर पर सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रशासन का मुख्य ध्यान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है।