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जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा: राजनीतिक हलचल तेज

जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी दल 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं। इस प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है, ताकि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए। जानें इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की क्या रणनीतियाँ हैं और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने क्या सवाल उठाए हैं।
 

राजनीतिक गतिविधियों में वृद्धि


जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी दल सक्रिय हो गए हैं। राज्य में चुनावों के बाद नई सरकार के गठन को दो साल होने वाले हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। पहले यह कहा गया था कि चुनावों के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी और जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा। पहले राजनीतिक दल अनुच्छेद 370 के हटने और राज्य के विभाजन का विरोध कर रहे थे, लेकिन अब उनकी मुख्य मांग पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की है।


लद्दाख को भी पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग उठ रही है। इस बीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।


इस प्रदर्शन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करना है, और इसमें सभी विपक्षी दलों की भागीदारी की उम्मीद है। कांग्रेस, पीडीपी और अन्य दल, जिनका जम्मू-कश्मीर में आधार नहीं है, भी इसमें शामिल होंगे। ध्यान रहे कि 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, और उस दिन प्रदर्शन होने से यह मुद्दा संसद में भी उठ सकता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी सवाल उठाया है कि जब पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं देना था, तो चुनाव कराने का क्या मतलब था?