जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी पर उमर अब्दुल्ला का स्पष्ट रुख: क्या है मीरवाइज की मांग?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का बयान
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शराबबंदी की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिनका धर्म शराब पीने की अनुमति देता है, वे इसका सेवन कर सकते हैं, लेकिन सरकार इस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाएगी।
उमर अब्दुल्ला का स्पष्ट उत्तर
उमर अब्दुल्ला ने कहा, "हमारा धर्म शराब के सेवन की अनुमति नहीं देता और हम नहीं चाहते कि लोग इस दिशा में बढ़ें, लेकिन जिनका धर्म अनुमति देता है, वे पी सकते हैं। हम प्रतिबंध नहीं लगाएंगे।" उन्होंने यह भी कहा कि शराब की दुकानें उन लोगों के लिए हैं जिनका धर्म इसे स्वीकार करता है।
स्थानीय लोगों के लिए नहीं हैं शराब की दुकानें
मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में शराब की दुकानें मुख्य रूप से बाहरी लोगों के लिए हैं और स्थानीय निवासियों के लिए नहीं। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं: पहला, कोई नई शराब की दुकान नहीं खोली गई है, और दूसरा, दुकानों को युवाओं के प्रभावित क्षेत्रों से दूर रखा गया है।
मीरवाइज उमर फारूक की अपील
इस विवाद की शुरुआत मीरवाइज उमर फारूक द्वारा हुई। उन्होंने जुमे की नमाज के बाद जम्मू-कश्मीर सरकार से शराब नीति पर पुनर्विचार करने और पूरे केंद्र शासित प्रदेश में सभी मादक पदार्थों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपील की।
मीरवाइज ने कहा कि युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए सभी प्रकार के नशे पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक अस्थिरता, तनाव, बेरोजगारी और सीमित आर्थिक अवसरों को युवाओं के नशे की ओर बढ़ने का मुख्य कारण बताया और मादक पदार्थों के तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
विवाद का कारण
मीरवाइज उमर फारूक का कहना है कि एक नशे से लड़ते हुए दूसरे नशे को बढ़ावा देना उचित नहीं है। युवा पीढ़ी पहले से ही कई समस्याओं का सामना कर रही है, ऐसे में नशा उनके भविष्य को और भी खराब कर सकता है।
उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद कश्मीर में शराबबंदी का मुद्दा फिर से गरमा गया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट रुख है कि वे नशे के खिलाफ जागरूकता और युवा सुरक्षा पर ध्यान देंगे, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाएंगे।