जापान ने हथियार निर्यात पर प्रतिबंध हटाया: नया अध्याय शुरू
जापान की नई नीति: 80 साल पुराना बैन समाप्त
जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से लागू अपनी शांतिवादी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। उसने घातक हथियारों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय चीन और उत्तर कोरिया की बढ़ती आक्रामकता के मद्देनजर जापान के हथियार उद्योग को सशक्त बनाने के प्रयास का हिस्सा है। अब जापान फाइटर जेट, मिसाइल और युद्धपोत जैसे हथियार अन्य देशों को बेच सकेगा।
नए दिशा-निर्देशों का अनुमोदन
प्रधानमंत्री साने ताकाइची की कैबिनेट ने इस संदर्भ में निर्णय लिया। नए दिशा-निर्देशों के अनुमोदन के साथ, जापान द्वारा विकसित युद्धपोतों, लड़ाकू ड्रोन और अन्य हथियारों की बिक्री में रुकावटें समाप्त हो गई हैं। पहले, 1976 में लागू नियमों के तहत, जापान केवल गैर-घातक सैन्य उपकरणों का निर्यात कर सकता था।
हथियारों का उपयोग यूएन चार्टर के अनुसार
ताकाइची ने कहा कि अब सभी रक्षा उपकरणों का हस्तांतरण संभव होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हथियार केवल उन देशों को दिए जाएंगे जो यूएन चार्टर के अनुसार उनका उपयोग करने का वादा करेंगे। जापान के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कई देश जापानी हथियार खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं। हाल ही में, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच 7 अरब डॉलर का समझौता हुआ है।
जापान की शांतिवादी नीति का इतिहास
द्वितीय विश्व युद्ध और हिरोशिमा-नागासाकी पर परमाणु हमलों के बाद, जापान ने युद्ध से दूर रहने का निर्णय लिया। संविधान के आर्टिकल 9 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि जापान युद्ध नहीं करेगा और उसकी सेना केवल आत्मरक्षा तक सीमित रहेगी। 1976 में, जापान ने घातक हथियारों के निर्यात पर लगभग पूर्ण रोक लगा दी थी।
युद्धग्रस्त देशों को नहीं बेचे जाएंगे हथियार
इस निर्णय के तहत, कम से कम 17 देश जापान से हथियार खरीद सकेंगे, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फिलीपींस और इंडोनेशिया शामिल हैं। हालांकि, जापान उन देशों को हथियार नहीं बेचेगा जहां युद्ध चल रहा है। विशेष परिस्थितियों में, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में, छूट दी जा सकती है।