☰
×

जीएसटी कौंसिल ने व्यापारियों को दी राहत, टैक्स चोरी की सीमा बढ़ाई

जीएसटी कौंसिल की हालिया बैठक में व्यापारियों को राहत देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में टैक्स चोरी की न्यूनतम सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किया गया है। इसके अलावा, 10 हजार रुपये से कम की टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं दिया जाएगा। जानें इस बैठक के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय और उनके व्यापारियों पर प्रभाव के बारे में।
 

जीएसटी कौंसिल की महत्वपूर्ण बैठक


नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कौंसिल ने व्यापारियों को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित जीएसटी कौंसिल की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पांच करोड़ रुपये से कम की टैक्स चोरी के मामलों में अब टैक्स अधिकारी सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे। जीएसटी कौंसिल की 53वीं बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।


इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह था कि जीएसटी मामलों में आपराधिक मुकदमा दायर करने की न्यूनतम सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। इसका मतलब है कि अब पांच करोड़ रुपये से कम की गड़बड़ी को केवल जुर्माना भरकर सुलझाया जा सकेगा।


इसके अतिरिक्त, 10 हजार रुपये से कम की टैक्स चोरी के मामलों में कारोबारी को नोटिस भी नहीं दिया जाएगा। कौंसिल ने ऑनलाइन सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए नियमों को भी सरल बनाया है, हालांकि मौजूदा टैक्स स्लैब या दर संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है।


जीएसटी कौंसिल ने अधिकारियों को दी गई गिरफ्तारी की शक्तियों को वापस लेने के साथ ही, मामलों में तय न्यूनतम सजा के प्रावधान को भी समाप्त कर दिया है। अब किसी भी मामले में जुर्माना, जेल या दोनों प्रकार की सजा तय करने का अधिकार पूरी तरह से अदालतों के विवेक पर निर्भर करेगा। इससे कर अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगेगी।


इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे को लेकर ईमानदारी से व्यापार करने वाले खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कौंसिल ने अधिकारियों की एक समिति बनाने का निर्णय लिया है, जो तीन महीने में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।