झारखंड और पटना यूनिवर्सिटी चुनावों में भाजपा को मिली हार
भाजपा की हार का विश्लेषण
केंद्र सरकार द्वारा यूजीसी की नई नियमावली जारी करने के बाद, उत्तर भारत में झारखंड के शहरी निकाय चुनाव और बिहार में पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव हुए। इन दोनों चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को गंभीर हार का सामना करना पड़ा। यह पहली बार है जब झारखंड में भाजपा शहरी क्षेत्रों में हारी है। पिछले विधानसभा चुनाव में, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस के गठबंधन ने भाजपा को ग्रामीण और वन क्षेत्रों में हराया था, लेकिन इस बार यह हार शहरी क्षेत्रों में भी हुई। देवघर, धनबाद, बोकारो और पाकुड़ जैसे शहरों में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा। यह ध्यान देने योग्य है कि जेएमएम और कांग्रेस ने इस बार अलग-अलग चुनाव लड़ा, फिर भी भाजपा को हराने में सफल रहे।
पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में कांग्रेस की जीत
पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव में भी भाजपा को निराशा मिली। यहां, अध्यक्ष और महासचिव के पदों पर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने जीत हासिल की। उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सफलता पाई। चुनाव परिणामों के बाद एबीवीपी के कार्यालय में हिंसा की घटनाएं भी हुईं, जिसमें प्रांत संगठन मंत्री दिनेश यादव और पूर्व प्रांत संगठन मंत्री रोशन के बीच झड़प की खबरें आईं। चुनाव के आयोजक याज्ञवल्क्य शुक्ल को पुलिस की सुरक्षा में वहां से बाहर निकलना पड़ा। झारखंड के शहरी निकाय चुनाव और पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में भाजपा की हार यूजीसी की नियमावली के प्रभाव को दर्शाती है। इस मुद्दे पर सामान्य वर्ग के लोगों ने भाजपा और एबीवीपी का विरोध किया, यह कहते हुए कि यह नीति सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण है।
यूजीसी नियमावली पर चर्चा
अब यह जानकारी मिली है कि हरियाणा के समालखा में 12 मार्च से शुरू होने वाली संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में यूजीसी की नियमावली पर चर्चा की जा सकती है।