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झारखंड के दलित नेताओं की नई नियुक्तियाँ: भाजपा की रणनीति पर नजर

झारखंड में दलित नेताओं की नई नियुक्तियों ने राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मचा दी है। भाजपा ने पलामू क्षेत्र के ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया है, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजा है। यह नियुक्तियाँ दर्शाती हैं कि भाजपा दलित समुदाय के जाटव और रविदास जातियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो आमतौर पर कांग्रेस के प्रति झुकाव रखते हैं। इस लेख में जानें कि कैसे ये नियुक्तियाँ भाजपा की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं और कांग्रेस के दलित वोट बैंक पर इसका क्या असर होगा।
 

राजनीतिक नियुक्तियों का नया दौर


झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलामू क्षेत्र के बैद्यनाथ राम को राज्यसभा में भेजा है, जबकि भाजपा ने उसी क्षेत्र के ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया है। इससे पहले, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया था, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अब एक कम चर्चित नेता को यह जिम्मेदारी दी गई है। यह नियुक्ति दर्शाती है कि भाजपा दलित समुदाय के जाटव और रविदास जातियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो आमतौर पर कांग्रेस के प्रति झुकाव रखते हैं। उत्तर प्रदेश में, यह समुदाय मायावती से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है।


दुष्यंत गौतम, जो उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख दलित नेता हैं, को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है। ब्रजमोहन राम की नियुक्ति हाल के समय में रविदास समाज से दूसरी महत्वपूर्ण नियुक्ति है। जून में, भाजपा ने बिहार के शिवेश राम को राज्यसभा में भेजा था। शिवेश राम के पिता एक पूर्व आईएएस अधिकारी थे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री रह चुके थे।


कांग्रेस पार्टी के मल्लिकार्जुन खड़गे के अध्यक्ष बनने के बाद से, दलितों का झुकाव कांग्रेस की ओर बढ़ता दिख रहा है। यह पार्टी अपने मुस्लिम और दलित वोट बैंक को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है, जिससे भाजपा चिंतित है। इसलिए, भाजपा ने दलितों के प्रति अपनी पहुँच बढ़ाने का प्रयास शुरू किया है, जो सरकार की योजनाओं और पार्टी की नियुक्तियों में स्पष्ट है।