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झारखंड में छात्रों पर लाठीचार्ज से बदला राजनीतिक माहौल

झारखंड में छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज ने राजनीतिक माहौल को बदल दिया है। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष का एजेंडा प्रभावित हुआ है, खासकर कांग्रेस का। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। समाजवादी पार्टी ने इस मौके का लाभ उठाते हुए अपने मुद्दों को प्रमुखता दी है। जानें कैसे इस घटना ने कांग्रेस के रणनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित किया और क्या इसके पीछे की वजहें हैं।
 

संसद में विपक्ष का एजेंडा प्रभावित

संसद के मानसून सत्र के पहले तीन हफ्तों में विपक्ष ने अपने मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। लेकिन अंतिम सप्ताह में स्थिति बदल गई। झारखंड में छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के बाद माहौल में बदलाव आया। 10 अगस्त को हेमंत सोरेन की पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, जिसके बाद विपक्ष ने बैकफुट पर आकर अपनी रणनीति में बदलाव किया। राहुल गांधी इस दौरान नजर नहीं आए, न ही उन्होंने कोई सोशल मीडिया पोस्ट की या प्रेस कॉन्फ्रेंस की। एक दिन पहले उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ शर्तें रखी थीं, जिसमें प्रधानमंत्री से माफी मांगने की मांग शामिल थी।


मंगलवार को प्रियंका गांधी वाड्रा संसद में उपस्थित रहीं, लेकिन जब एनडीए के सांसदों ने उन्हें घेरा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना उचित समझा। हालांकि, उन्होंने बाद में मीडिया से बातचीत की। मंगलवार सुबह संसद परिसर का माहौल पूरी तरह से बदल चुका था। बुधवार को भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। भाजपा के सांसद रांची की घटना पर प्रदर्शन कर रहे थे, जबकि कांग्रेस सांसदों के हाथों से 'अमित शाह जवाब दो' के बैनर गायब थे।


इस बदले माहौल से न केवल सरकार खुश है, बल्कि कांग्रेस की सहयोगी समाजवादी पार्टी के नेता भी संतुष्ट हैं। पहली बार उनके मुद्दों को इतनी तवज्जो मिल रही है। समाजवादी पार्टी के नेता पहले दिन से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहे थे। इसके लिए सपा के सांसद हर दिन संसद परिसर में प्रदर्शन कर रहे थे। कांग्रेस ने भी एक दिन पप्पू यादव के माध्यम से प्रदर्शन कराया, लेकिन अब सपा ने इसे संभाल लिया है।


सपा को लगता है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए चढ़ावे की चोरी का मुद्दा एक महत्वपूर्ण भावनात्मक मुद्दा है, जो भाजपा के व्यापक हिंदू गठबंधन को चुनौती दे सकता है। यदि व्यापक हिंदू एकता में कोई दरार आती है, तो अखिलेश यादव का पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक का गठबंधन सफल हो सकता है। लोकसभा चुनाव में उन्हें यह वोट मिला था।


हालांकि, झारखंड में छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज ने कांग्रेस के उस एजेंडे को कमजोर कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जंतर मंतर पर पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया था। रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कई बार लाठीचार्ज किया गया। रात के अंधेरे में पुलिस ने छात्रों को विधानसभा के पास से खदेड़ दिया। छात्रों को रोकने के लिए कंटीले तारों की बाड़ लगाई गई, जिससे कई छात्र घायल हुए। सवाल यह है कि जब झारखंड सरकार ने छात्रों की 98 प्रतिशत मांगें मान लीं, तो दो प्रतिशत के लिए इतना हंगामा क्यों होने दिया गया? इसके अलावा, राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रबंधकों को यह भी पता होगा कि 10 अगस्त को जब छात्र विधानसभा घेरने निकलेंगे, तो पुलिस कार्रवाई होगी। फिर राहुल ने हेमंत से बात करके पहले ही आंदोलन समाप्त करने का प्रयास क्यों नहीं किया? क्या हेमंत ने राहुल को कोई वादा किया था? अब इस पर कई चर्चाएं हैं। लेकिन हकीकत यह है कि हेमंत सरकार की पुलिस की कार्रवाई ने दिल्ली और अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस के एजेंडे को प्रभावित किया है। हेमंत को इससे क्या लाभ होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन धारणा के स्तर पर कांग्रेस और राहुल गांधी को बड़ा नुकसान हुआ है।