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झारखंड में परिमल नाथवानी की स्थिति: क्या रोक पाएंगे विपक्षी दल?

झारखंड में परिमल नाथवानी की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा हो रही है, जहां कांग्रेस के विधायकों का समर्थन संदिग्ध है। राजद के विधायक भी नाथवानी का समर्थन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी भाजपा पर हमले कर रही है, लेकिन क्या यह नाथवानी की जीत को रोक पाएगी? जानें पूरी कहानी में क्या हो रहा है।
 

झारखंड की राजनीतिक स्थिति


रांची में एक मजेदार सवाल उठ रहा है कि अगर मध्य प्रदेश में भाजपा के महेश केवट जीत जाते हैं, तो झारखंड में परिमल नाथवानी को कौन रोक सकता है? यह सवाल काफी प्रासंगिक है, और ऐसा लगता है कि कोई भी उन्हें रोकने की स्थिति में नहीं है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उनके 16 विधायकों में से आधे से अधिक का भरोसा नहीं किया जा सकता। वहीं, राजद के संदर्भ में यह बताया जा रहा है कि पटना से उन्हें निर्देश मिले हैं कि चार में से तीन विधायक नाथवानी का समर्थन करेंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि लालू परिवार हाल ही में मुकेश अंबानी के बेटे की शादी में मुंबई में था। इसके अलावा, अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक जयराम महतो का झुकाव भी नाथवानी की ओर है।


यह सोचने वाली बात है कि एनडीए के 24 वोटों के अलावा नाथवानी को केवल चार वोटों की आवश्यकता है, जबकि कम से कम 14 विधायक उनके समर्थन में खड़े हैं।


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी हाल के दिनों में भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखे हमले कर रही है। राजनीति के अलावा, जेएमएम के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से विदेश और सामरिक मामलों पर भी केंद्र सरकार को निशाना बनाया जा रहा है। इस स्थिति ने जेएमएम की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहा जा रहा है कि यह सब एक रणनीति है, क्योंकि अंततः मदद भाजपा समर्थित उम्मीदवार को ही करनी है। हेमंत सोरेन के पास एक सीट जीतने के बाद केवल छह विधायक रह जाएंगे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उनमें से कितने कांग्रेस को वोट देंगे। इस प्रकार, कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणब झा की स्थिति काफी कमजोर नजर आ रही है। यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें इस बात का एहसास है, इसलिए वे सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस या सहयोगी दलों के विधायकों के साथ बैठक करने की कोई पहल नहीं की है। जानकारों का मानना है कि उन्हें 28 वोट मिलने की उम्मीद है, लेकिन अगर 20 वोट भी मिल जाएं, तो यह बड़ी बात होगी।