झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तैयारी: राजनीतिक समीकरण और संभावनाएं
राज्यसभा चुनाव की तैयारी में झारखंड की स्थिति
बिहार, हरियाणा और ओडिशा में हालिया घटनाक्रम ने झारखंड में राजनीतिक चिंताओं को बढ़ा दिया है। ध्यान देने योग्य है कि झारखंड में जून में राज्यसभा की दो सीटें रिक्त होने जा रही हैं, जिनके लिए मई में चुनाव होंगे। वर्तमान में, झारखंड में कांग्रेस के समर्थन वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) सरकार है, जिसके पास 56 विधायकों का समर्थन है। विधानसभा में 81 सदस्य हैं, और राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होती है। इस स्थिति में, जेएमएम गठबंधन को आसानी से दो सीटें मिल सकती हैं। एक सीट जेएमएम के संस्थापक शिबू सोरेन की है, जो पिछले साल उनके निधन के बाद से खाली है, जबकि दूसरी सीट भाजपा के दीपक प्रकाश की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोनों सीटों पर दावेदारी की है, लेकिन कांग्रेस और राजद के दबाव में उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ सकती है.
राजनीतिक समीकरण और संभावित उम्मीदवार
राज्य में कांग्रेस और राजद के पास मिलाकर 20 विधायक हैं, जबकि दो विधायक वामपंथी पार्टियों से हैं। इस प्रकार, 22 विधायकों का एक समूह बनता है, जिसमें यदि हेमंत सोरेन अपने छह अतिरिक्त वोट ट्रांसफर करते हैं, तो कांग्रेस और राजद का एक संयुक्त उम्मीदवार जीत सकता है। चर्चा है कि बिहार और झारखंड से पांच बार राज्यसभा सांसद रहे प्रेमचंद गुप्ता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, कांग्रेस अपने उम्मीदवार को पेश करना चाहती है, जिसमें धीरज साहू और सुबोधकांत सहाय जैसे नाम शामिल हैं। दूसरी ओर, भाजपा गठबंधन के पास 24 विधायक हैं और उन्हें चार अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है। सत्तारूढ़ गठबंधन से जो भी उम्मीदवार आएगा, उसे बहुत सावधानी से प्रबंधन करना होगा, क्योंकि कांग्रेस, राजद और वामपंथी विधायक एक ही दिशा में नहीं हैं। वहीं, एनडीए को केवल चार वोटों का प्रबंधन करना होगा। तीन राज्यों में कांग्रेस विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग के हालिया उदाहरणों ने झारखंड में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है.