झारखंड में राज्यसभा चुनाव: जेएमएम और कांग्रेस के बीच खींचतान
राज्यसभा की सीटों पर चुनाव की तैयारी
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनमें से एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के संस्थापक शिबू सोरेन की है, जो पिछले साल जुलाई में निधन हो गए थे। दूसरी सीट भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश की है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं, जिससे एक सीट जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान में जेएमएम के नेतृत्व वाली सरकार के पास 56 विधायकों का समर्थन है। यदि गठबंधन मिलकर चुनाव लड़े, तो दोनों सीटें आसानी से जीत सकते हैं। हालांकि, जेएमएम और कांग्रेस के बीच एकता की कमी देखी जा रही है।
भाजपा ने कई राज्यों में ऐसे प्रयोग किए हैं, जहां उनकी संख्या पूरी नहीं होती, वे निर्दलीय उम्मीदवारों को उतारकर जीतने का प्रयास करती हैं। यदि भाजपा ऐसा करती है, तो चुनाव में दिलचस्पी बढ़ जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, शिबू सोरेन की सीट पर उनके परिवार के किसी सदस्य को भेजने की योजना है। उनकी बेटी अंजली सोरेन, हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन और बसंत सोरेन की पत्नी लता सोरेन के नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा, जेएमएम छोड़कर गईं सीता सोरेन की वापसी की भी संभावना है। दूसरी सीट पर हेमंत सोरेन अपनी पार्टी के किसी नेता को भेजना चाहते हैं, जबकि कांग्रेस इस सीट की मांग कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि पिछले तीन चुनावों में जेएमएम ने उन्हें एक भी राज्यसभा सीट नहीं दी।
कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं और उन्हें चुनाव जीतने के लिए जेएमएम के छह वोट, राजद के चार और लेफ्ट के दो वोट की आवश्यकता है। दोनों पार्टियों को अकेले चुनाव जीतने में कठिनाई होगी।
भाजपा इस स्थिति का लाभ उठाकर सीट हासिल करने की कोशिश कर सकती है। पूर्व सांसद परिमल नाथवानी, जो आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं, फिर से चुनावी मैदान में उतरने की योजना बना रहे हैं। यदि भाजपा उन्हें समर्थन देती है, तो वे जेएमएम के वोट से जीत सकते हैं। भाजपा के पास 21 विधायक हैं, साथ ही आजसू, लोजपा और जदयू के तीन विधायक भी हैं। इस प्रकार, भाजपा 24 या 25 वोट जुटाने में सक्षम है। दूसरी ओर, जेएमएम और कांग्रेस के दूसरे उम्मीदवार को चुनावी प्रबंधन में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।