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टीएमसी की SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, चुनाव परिणामों पर उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद टीएमसी ने SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा। सुनवाई के दौरान, टीएमसी के वरिष्ठ वकील ने आंकड़ों के माध्यम से अपनी दलीलें पेश कीं। निर्वाचन आयोग ने टीएमसी की दलीलों का विरोध किया है। जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
 

नई दिल्ली में SIR प्रक्रिया पर टीएमसी की याचिका


नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हो चुके हैं और बीजेपी ने राज्य में सरकार बना ली है। हालांकि, टीएमसी ने SIR प्रक्रिया को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रखा है। टीएमसी ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर आज मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने सुनवाई की।


सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी की याचिका पर सुनवाई के दौरान पार्टी के लोकसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अपने तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के कारण उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।


टीएमसी की दलीलें

कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन मतदाताओं की संख्या से कम था, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी पार्टी के प्रत्याशी एक सीट पर केवल 862 वोटों से हारे, जबकि उस क्षेत्र से 5000 से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।


उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी और बीजेपी के बीच कुल वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था, जबकि SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटाए गए नामों के खिलाफ दायर अपीलों की संख्या 35 लाख से अधिक है। कल्याण बनर्जी ने चिंता जताई कि इन अपीलों का निपटारा करने में कई साल लग सकते हैं।


सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने कल्याण बनर्जी की दलीलों पर कहा कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में जीत का अंतर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या से कम है, तो संबंधित पक्ष नई याचिका दायर कर सकते हैं। अदालत ने पहले भी संकेत दिया था कि ऐसे मामलों की जांच की जाएगी, जहां जीत-हार का अंतर SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए नामों की संख्या से कम हो।


निर्वाचन आयोग का विरोध

इस बीच, निर्वाचन आयोग ने टीएमसी की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी उपाय चुनाव याचिका के माध्यम से उपलब्ध हैं। निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता डीएस नायडू ने कोर्ट में कहा कि चुनाव संबंधी विवादों पर कानून स्पष्ट है और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग केस नहीं चलाए जा सकते। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की बात कही।