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टीएमसी में बगावत: बागी सांसदों ने भाजपा से मिलाया हाथ

तृणमूल कांग्रेस में बगावत की एक नई लहर आई है, जिसमें बागी सांसदों ने भाजपा के साथ विलय का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य दलबदल विरोधी कानून से बचना है। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर खुद को अलग गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में हलचल मचा दी है। जानें इस बगावत के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

टीएमसी में बगावत का नया मोड़

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में एक महत्वपूर्ण बगावत सामने आई है। पार्टी के बागी सांसदों ने भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस दौरान बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी' के साथ विलय का निर्णय लिया है। यह कदम दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए उठाया गया है, जिससे पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक की राजनीतिक स्थिति में हलचल मच गई है।


सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय शामिल हैं, जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इन सांसदों ने लोकसभा में खुद को अलग बैठने की व्यवस्था की औपचारिक मांग की है। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ टीएमसी के 28 में से 20 से 22 सांसद हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि उन्हें असली टीएमसी विधायी दल के रूप में मान्यता दी जाए।


भूपेंद्र यादव के साथ बैठक का महत्व
टीएमसी के बागी सांसदों ने भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से दिल्ली में विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में सयानी घोष और माला रॉय भी शामिल थीं। चुनाव के दौरान सयानी घोष ने भाजपा पर तीखे हमले किए थे, लेकिन अब उन्होंने भी अपना पक्ष बदल लिया है।


भाजपा को समर्थन देने की तैयारी
कानूनी दृष्टिकोण से सदन में किसी 'अलग गुट' को मान्यता मिलना कठिन है। इसलिए, टीएमसी के बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी' में विलय का निर्णय लिया है। हालांकि, इस विलय की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन इसे एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।