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टीएमसी में बगावत: सयानी घोष और 20 सांसदों ने उठाई अलग पहचान की मांग

पश्चिम बंगाल में टीएमसी के विधायक दल में बिखराव के बाद, 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अलग पहचान की मांग की है। इस पत्र में सयानी घोष का नाम भी शामिल है, जो ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका है। सयानी घोष, जो एक प्रसिद्ध अभिनेत्री और सांसद हैं, ने पहले बीजेपी के खिलाफ बयान दिए थे। जानें उनके राजनीतिक सफर और इस बगावत के पीछे की कहानी।
 

टीएमसी में टूट का संकेत


पश्चिम बंगाल में विधायक दल में असहमति के बाद, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संसदीय दल में विभाजन की पुष्टि हो गई है। टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र भेजकर संसद में अलग व्यवस्था की मांग की है, जिसमें प्रमुख रूप से सयानी घोष का नाम शामिल है। इस पत्र पर सयानी घोष ने भी हस्ताक्षर किए हैं। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।


सयानी घोष, जो एक प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री और गायिका हैं, वर्तमान में जादवपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनके गाने 'मेरे दिल में है काबा और आंखों में मदीनाट' ने चुनाव प्रचार के दौरान काफी विवाद उत्पन्न किया था। बीजेपी नेताओं ने इस गाने को लेकर ममता बनर्जी पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाया था। अब, टीएमसी के बागी सांसदों ने बीजेपी का समर्थन करने का ऐलान किया है, जिसमें सयानी घोष भी शामिल हैं।


सयानी घोष की राजनीतिक यात्रा

सयानी घोष ने 2021 विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी में शामिल होने का निर्णय लिया था। वह एक युवा और महिला नेता के रूप में काफी चर्चित रहीं। बांग्ला फ़िल्मों में उनकी पहचान ने उन्हें राजनीति में कदम रखने से पहले ही एक प्रसिद्ध चेहरा बना दिया था। पार्टी में शामिल होने के बाद, ममता बनर्जी ने उन्हें आसनसोल सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह बीजेपी के उम्मीदवार से हार गईं। इसके बाद, उन्होंने राजनीति में तेजी से आगे बढ़ने का निर्णय लिया।


2021 में, सयानी घोष को त्रिपुरा में गिरफ्तार किया गया था। वहां स्थानीय चुनावों के दौरान उन्होंने बीजेपी के खिलाफ नारेबाजी की थी, जिसके चलते उन पर मुकदमा दर्ज किया गया।


2024 में जाधवपुर से सांसद बनीं

2023 में, जब सयानी घोष को टीएमसी की युवा विंग का अध्यक्ष बनाया गया, तब ईडी ने उनसे पश्चिम बंगाल के भर्ती घोटाले की जांच के सिलसिले में दस घंटे तक पूछताछ की। सयानी घोष, जो 1993 में कोलकाता में जन्मी थीं, टीएमसी के सबसे चर्चित युवा चेहरों में से एक हैं। उन्होंने 2024 में टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2026 के विधानसभा चुनाव में वह पार्टी की प्रमुख प्रचारक रहीं, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद उनके विचार भी बदलते दिख रहे हैं।


टीएमसी में बगावत की पुष्टि

पश्चिम बंगाल में विधायक दल में बिखराव के बाद, टीएमसी संसदीय दल में टूट की पुष्टि हो गई है। टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था की मांग की है, जिसमें सयानी घोष का नाम भी शामिल है। पत्र में अभिषेक बनर्जी की जगह काकोली घोष को टीएमसी संसदीय दल का नेता बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।


स्पीकर को हस्ताक्षर करने वालों में टीएमसी के अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश वसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदर, असित मल, सुवेंदु शेखर रॉय समेत 20 सांसद शामिल हैं।