ट्रंप का गाजा शांति बोर्ड: भारत को शामिल करने की कोशिश या आर्थिक लाभ?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में शांति स्थापित करने के लिए एक नया बोर्ड बनाने की घोषणा की है। इस बोर्ड में भारत को शामिल करने का न्योता दिया गया है, जिससे कई चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। ट्रंप का यह कदम आर्थिक लाभ के लिए भी एक मंच बन सकता है। इजराइल ने इस बोर्ड को अपनी नीति के खिलाफ बताया है और इसमें शामिल देशों पर भी आपत्ति जताई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या है ट्रंप का असली मकसद।
Jan 20, 2026, 19:37 IST
ट्रंप का नया शांति बोर्ड
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को वैश्विक मामलों में सबसे प्रभावशाली नेता मानते हैं। उनकी कोशिशें अक्सर विभिन्न देशों के बीच विवादों में हस्तक्षेप करने की होती हैं। हालांकि, ट्रंप का यह प्रयास शांति के बजाय विवादास्पद नजर आता है। हाल ही में, उन्होंने गाजा में शांति स्थापित करने के लिए एक नया बोर्ड बनाने की घोषणा की है। उनका दावा है कि यह बोर्ड इजराइल-हमास संघर्ष को समाप्त करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, यह गाजा के दैनिक मामलों की देखरेख करने और पुनर्निर्माण के लिए रणनीति तैयार करने का कार्य करेगा।
भारत को न्योता
ट्रंप ने भारत को भी इस गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण दिया है, जिससे कई चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम पीएम मोदी को एक कठिन स्थिति में डालने का प्रयास है। अमेरिका के राष्ट्रपति अक्सर ऐसे प्रस्ताव लाते हैं जो अन्य देशों की नीतियों के खिलाफ होते हैं, लेकिन उनका अपना हित हमेशा सर्वोपरि होता है। गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बनाए गए इस बोर्ड में भी यही दृष्टिकोण दिखाई देता है। ट्रंप का यह शांति बोर्ड आर्थिक लाभ कमाने के लिए भी एक मंच बन सकता है।
शांति बोर्ड की फीस
इस बोर्ड में शामिल होने के लिए देशों को $1 अरब डॉलर (लगभग ₹9000 करोड़) का योगदान देना होगा। इस भारी शुल्क को देखते हुए कनाडा और फ्रांस ने इसमें शामिल न होने का संकेत दिया है। ट्रंप का यह कदम भारत को बोर्ड में शामिल करके पीएम मोदी को एक मुश्किल स्थिति में डालने की कोशिश कर रहा है। गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बनाए गए इस बोर्ड के पीछे की वास्तविकता यह है कि गाजा के आतंकवादी अब पाकिस्तान में शरण ले चुके हैं।
इजराइल की प्रतिक्रिया
भारत को ट्रंप के शांति बोर्ड में शामिल करने के प्रयास को लेकर इजराइल ने भी चिंता व्यक्त की है। इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बोर्ड को अपनी सरकारी नीति के खिलाफ बताया है। इजराइल का कहना है कि बोर्ड की घोषणा से पहले उनसे चर्चा नहीं की गई। इसके अलावा, पाकिस्तान, तुर्की और कतर जैसे देशों को बोर्ड में शामिल करने पर भी इजराइल ने कड़ी आपत्ति जताई है।