ट्रंप का सैन्य शक्ति पर जोर: अमेरिका की वैश्विक रणनीति पर सवाल
ट्रंप का दृष्टिकोण
डॉनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अमेरिकी सेना के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनकी शक्ति केवल उनकी 'नैतिकता' द्वारा सीमित है।
न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गए एक साक्षात्कार में, ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को नजरअंदाज करते हुए कहा कि उनकी सैन्य शक्ति का उपयोग करने की क्षमता पर कोई बाहरी रोक नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी शक्तियों पर कोई सीमा है, तो ट्रंप ने कहा, 'मेरी नैतिकता ही एकमात्र सीमा है।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून की आवश्यकता नहीं है।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यह वे ही होंगे जो तय करेंगे कि अमेरिका पर कब कोई प्रतिबंध लागू होगा।
अमेरिका की शक्ति का प्रदर्शन
ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका ने स्पष्ट रूप से शक्ति के सिद्धांत को अपनाया है, जिसका अर्थ है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और बहुपक्षीय सहयोग की परंपराओं को दरकिनार कर दिया गया है।
हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने 66 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका को अलग करने का निर्णय लिया, जिसमें कई संयुक्त राष्ट्र की संस्थाएं शामिल हैं।
युद्ध की तैयारी
नए साल की घटनाओं पर नजर डालते हुए, ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रंप युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने वेनेजुएला पर हमले की योजना बनाई है और अन्य देशों पर भी कब्जा करने की धमकी दी है।
उनकी रणनीति का उद्देश्य अमेरिका के वर्चस्व को पुनर्स्थापित करना है, खासकर चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना।
चीन के खिलाफ रणनीति
ट्रंप प्रशासन की नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में यह स्पष्ट किया गया है कि पहले लैटिन अमेरिका में अमेरिकी वर्चस्व को पुनर्स्थापित किया जाएगा।
हालांकि, क्या ट्रंप अपनी 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की योजना को सफल बना पाएंगे? यह सवाल महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी साम्राज्य का संकट
ट्रंप की वेनेजुएला संबंधी जिद केवल लोकतंत्र या मानवाधिकारों के लिए नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए भी एक चुनौती है।
अमेरिका को अब अपनी सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के अलावा कुछ हासिल नहीं हो रहा है, और यह साम्राज्य के अवसान का संकेत है।