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ट्रंप की ईरान के खिलाफ युद्ध की योजना पर सीनेटर मर्फी की चेतावनी

कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ एक नया युद्ध शुरू करने की योजना बना रहे हैं। मर्फी ने इसे पागलपन करार दिया और कहा कि इससे तनाव और बढ़ेगा। इस बीच, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार किया है, जबकि इस संघर्ष की आर्थिक लागत लगातार बढ़ रही है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

सीनेटर मर्फी का गंभीर आरोप

कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी ने यह दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ एक नया युद्ध शुरू करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने इस बात की चेतावनी दी है कि यह प्रस्तावित सैन्य रणनीति तनाव को और बढ़ा सकती है। मर्फी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि कुछ लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी दी गई है, लेकिन उन्होंने इसके विवरण को साझा करने से मना कर दिया। उन्होंने इसे पागलपन करार देते हुए कहा कि इससे कोई लक्ष्य हासिल नहीं होगा, बल्कि संघर्ष और बढ़ेगा। मर्फी ने प्रेस से कहा, "हममें से कुछ को इस युद्ध योजना के बारे में बताया गया है। हालांकि मैं इसके बारे में कोई विवरण नहीं दे सकता, लेकिन यह योजना पूरी तरह से पागलपन भरी है।" इस पोस्ट को रिपोर्ट किए जाने के समय तक इसे 2.8 मिलियन बार देखा जा चुका था। यह दावा ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहा है, जबकि इस संघर्ष की आर्थिक और राजनीतिक लागत लगातार बढ़ती जा रही है.


मिडटर्म चुनावों के बाद संभावित सैन्य कार्रवाई

ट्रंप ने कई बार ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू करने की संभावना जताई है, जिसमें 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कारक बनकर उभरे हैं। राष्ट्रपति ने पहले ही चेतावनी दी थी कि जब यह युद्ध आठ महीने के करीब पहुंच जाएगा, तो वाशिंगटन एक और सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। इस संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर चुनावों से पहले रिपब्लिकन उम्मीदवारों और ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग पर भी पड़ा है। ट्रंप ने फरवरी में इज़राइल के साथ मिलकर यह युद्ध शुरू किया था, और शुरुआत में यह अनुमान लगाया गया था कि यह संघर्ष कम समय तक चलेगा। हालांकि, अप्रैल में हुए युद्धविराम ने ईरान को अपनी सैन्य सुविधाओं को फिर से ठीक करने का समय दिया। इसके बाद, अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए उस पर नौसैनिक नाकेबंदी लगा दी है। नाम न बताने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि अगर ट्रंप आदेश देते हैं, तो पेंटागन फिर से भीषण लड़ाई की तैयारी कर रहा है।


ईरान युद्ध का आर्थिक बोझ

ईरान युद्ध का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है, और इस संदर्भ में फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना भी सामने आ रही है। रॉयटर्स को प्राप्त पेंटागन के आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष पर अमेरिकी सेना का खर्च 47 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है। यह जुलाई में रक्षा विभाग द्वारा लगाए गए अनुमान से 25 प्रतिशत से अधिक है। इस नए अनुमान में ऑपरेशनल खर्च शामिल हैं, जिसमें संघर्ष के दौरान इस्तेमाल किए गए हथियारों और गोला-बारूद की भरपाई के लिए 29 अरब डॉलर से अधिक की आवश्यकता का अनुमान है। इसके अलावा, विमानों और ड्रोन समेत सैन्य उपकरणों के नुकसान की भरपाई के लिए 6 अरब डॉलर से अधिक की और आवश्यकता होगी।