ट्रंप की ईरान को सरेंडर करने की अपील, सुप्रीम लीडर की सेहत पर उठाए सवाल
ट्रंप का ईरान के प्रति कड़ा रुख
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से सरेंडर करने की मांग की है। उन्होंने एक बयान में कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई संभवतः जीवित नहीं हैं। इसके साथ ही, उन्होंने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच युद्धविराम की संभावना को खारिज किया।
एक समाचार चैनल को दिए फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि तेहरान ने शत्रुता समाप्त करने की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन वह वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा, “ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन मैं अभी समझौता नहीं करना चाहता क्योंकि शर्तें पर्याप्त अच्छी नहीं हैं।” ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाला कोई भी समझौता “बहुत ठोस” होना चाहिए।
हाल ही में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद मुज्तबा खामेनेई की सेहत पर ट्रंप ने सवाल उठाए। उनके सार्वजनिक रूप से नजर न आने पर ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं पता कि वे जीवित भी हैं या नहीं। अब तक कोई भी उनसे मिल नहीं पाया है।” उन्होंने आगे कहा, “मैं सुन रहा हूं कि वे जीवित नहीं हैं। अगर वे जीवित हैं, तो उन्हें अपने देश के हित में समझदारी दिखानी चाहिए और सरेंडर करना चाहिए।”
इससे पहले, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि हालिया सैन्य हमलों के बाद मुज्तबा खामेनेई “घायल और संभवतः गंभीर रूप से विकृत” हो गए हैं। हेगसेथ ने कहा कि ईरानी नेतृत्व “डरा हुआ, घायल और वैधता से रहित” है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक तेल निर्यात केंद्र खारग द्वीप पर भारी हमले किए हैं। उनके अनुसार, इस अभियान में द्वीप को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि ऊर्जा अवसंरचना को पूरी तरह नष्ट नहीं किया गया ताकि भविष्य में पुनर्निर्माण आसान रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान की अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन क्षमताओं को नष्ट कर दिया है, जिससे उसकी घरेलू सैन्य उत्पादन क्षमता को बड़ा झटका लगा है। इसके अलावा, ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई देशों से युद्धपोत तैनात करने का आग्रह किया है। उन्होंने विशेष रूप से ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, जापान और दक्षिण कोरिया का नाम लिया।
ट्रंप ने कहा कि आगामी चुनावों पर इसके प्रभाव को लेकर उन्हें “बिल्कुल चिंता नहीं” है। उनका कहना है कि उनकी मौजूदा सैन्य और कूटनीतिक रणनीति का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में मध्य पूर्व में प्रभुत्व न जमा सके।