ट्रंप की युद्धपोत भेजने की अपील पर देशों का ठंडा रुख
युद्ध की स्थिति और ट्रंप की अपील
युद्ध अब अपने तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है, और जमीन पर हालात का सही आकलन करना कठिन हो गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है, जिनकी तेल और गैस की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण बाधित हो गई है। अमेरिका, जो कि अब्राहम लिंकन और फोर्ड जैसे विशाल बेड़े का मालिक है, अकेले ही होर्मुज पार करने में असमर्थ है।
7 मार्च को, ट्रंप ने ब्रिटेन का मजाक उड़ाते हुए कहा कि हमें ऐसे सहयोगियों की आवश्यकता नहीं है जो युद्ध जीतने के बाद शामिल होते हैं। हालांकि, एक सप्ताह बाद, उन्होंने उसी ब्रिटेन से होर्मुज के लिए युद्धपोत की मांग की। गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टारमर ने ट्रंप की अपील पर होर्मुज में युद्धपोत भेजने से मना कर दिया। ट्रंप ने कहा कि शायद अमेरिका को वहां नहीं होना चाहिए क्योंकि हमारे पास पर्याप्त तेल है।
ट्रंप की अपील और जापान का जवाब
14 मार्च को, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि होर्मुज बंद होने से प्रभावित देश अमेरिका के साथ अपने युद्धपोत भेजेंगे। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को नष्ट कर दिया है, लेकिन ईरान अभी भी ड्रोन या मिसाइल छोड़ सकता है। ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन से भी अपील की।
जापान ने ट्रंप की अपील को ठुकराते हुए कहा कि वह समुद्री सुरक्षा अभियानों पर विचार नहीं कर रहा है। जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है।
दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया की स्थिति
दक्षिण कोरिया ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर विचार कर रहा है और अमेरिका से बातचीत कर रहा है। सियोल में राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि स्थिति की पूरी समीक्षा की जाएगी।
वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने भी ट्रंप के अनुरोध के बावजूद होर्मुज में युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री ने कहा कि उन्हें कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है।
ट्रंप की धमकी और नाटो की स्थिति
ट्रंप ने लगभग सात देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, ईरान के साथ युद्ध के बीच, उनकी अपील पर अभी तक किसी देश ने ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। ट्रंप ने कहा कि यह समुद्री मार्ग अमेरिका के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि अमेरिका के पास अपने तेल के स्रोत हैं।