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ट्रंप प्रशासन का मतदाता धोखाधड़ी पर अभियान: 1,600 मामले और 160 गिरफ्तारियां

ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में मतदाता धोखाधड़ी की जांच के तहत 1,600 मामलों का खुलासा किया है, जिसमें 160 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह अभियान चुनावों में संभावित गड़बड़ियों की जांच के लिए संघीय संसाधनों का उपयोग कर रहा है। हालांकि, ये आंकड़े पहले किए गए दावों से काफी कम हैं। जानें इस अभियान की पूरी जानकारी और इसके पीछे की कानूनी चुनौतियों के बारे में।
 

मतदाता धोखाधड़ी की जांच में प्रगति

अमेरिका में राज्य स्तर पर मतदाता सूचियों में अवैध रूप से पंजीकृत गैर-नागरिकों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए ट्रंप प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत लगभग 1,600 मतदाता धोखाधड़ी के मामले उजागर हुए हैं, जिसमें 160 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी ‘होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस’ के वरिष्ठ अधिकारी मैथ्यू मिलहोलिन ने मंगलवार को साझा की। चुनावों से लगभग छह सप्ताह पहले जारी किए गए ये आंकड़े उस अभियान की प्रगति को दर्शाते हैं, जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर चुनावों में संभावित गड़बड़ियों की जांच के लिए संघीय संसाधनों और सैकड़ों कर्मचारियों को तैनात किया गया है।


हालांकि, ये आंकड़े ट्रंप और गृह सुरक्षा विभाग द्वारा पहले बताए गए उन लाखों गैर-नागरिक मतदाताओं की संख्या से काफी कम हैं, जिनके बारे में दावा किया गया था कि वे मतदाता सूचियों में शामिल हैं। अमेरिका में 21.1 करोड़ से अधिक सक्रिय पंजीकृत मतदाताओं की तुलना में ये मामले बहुत ही कम हैं। पूर्व चुनाव अधिकारियों और चुनाव कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि गैर-नागरिकों का मतदान और मतदाता धोखाधड़ी की घटनाएं अत्यंत दुर्लभ हैं।


मिलहोलिन ने न्याय विभाग और अमेरिकी डाक सेवा के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ये आंकड़े प्रस्तुत किए। कार्यवाहक उप अटॉर्नी जनरल ट्रेंट मैककॉट्टर ने बताया कि प्रशासन के कार्यभार संभालने के बाद से न्याय विभाग ने अवैध मतदान और पंजीकरण से संबंधित अपराधों में 70 व्यक्तियों के खिलाफ आरोप लगाए हैं। हालांकि, दोनों अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या इन आंकड़ों में कोई समान मामले शामिल हैं।


नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले, ट्रंप प्रशासन ने गैर-नागरिकों के मतदान पर रोक लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस मुद्दे से संबंधित उनके दो कार्यकारी आदेश वर्तमान में कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।