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ट्रंप प्रशासन ने टेरिफ रिफंड प्रक्रिया शुरू की, अमेरिकी आयातकों के लिए महत्वपूर्ण कदम

ट्रंप प्रशासन ने अरबों डॉलर के टेरिफ लौटाने की प्रक्रिया शुरू की है, जो अमेरिकी आयातकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टेरिफ राष्ट्रपति के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। भारतीय व्यापारी इस रिफंड के सीधे हकदार नहीं हैं, क्योंकि यह केवल अमेरिकी कंपनियों को दिया जाएगा। जानें इस प्रक्रिया के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

टेरिफ रिफंड की शुरुआत

सोमवार से, ट्रंप प्रशासन ने अरबों डॉलर के टेरिफ को वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह ट्रंप के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत हार है और टेरिफ लौटाने की दिशा में यह पहला ठोस कदम है। अमेरिकी आयातक और ब्रोकर अब उन टेरिफ के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं, जो ट्रंप प्रशासन ने उनसे वसूले थे। ध्यान देने योग्य है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में अमेरिका फर्स्ट नीति को लागू किया था, जिसके तहत उन्होंने विभिन्न देशों पर मनमाने ढंग से टेरिफ लगाए थे। भारत भी इस नीति का शिकार बना, जहां ट्रंप ने 50% टेरिफ लगाए थे। इस मामले को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, और लंबी सुनवाई के बाद, कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को 63 के बहुमत से अपना निर्णय सुनाया।


निर्णय में स्पष्ट किया गया कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टेरिफ को जिस इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट 1997 के तहत सही ठहराया गया था, वह राष्ट्रपति को शांति काल में टेरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।


अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

अमेरिकी संविधान के आर्टिकल एक के सेक्शन आठ के अनुसार, टेरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि ट्रंप ने अपने अधिकारों की सीमाओं का उल्लंघन किया है, इसलिए यह टेरिफ समाप्त किया जा रहा है। जिन कंपनियों को ट्रंप प्रशासन से टेरिफ रिफंड की आवश्यकता है, उन्हें उन सामानों की पहचान करते हुए घोषणाएं दाखिल करनी होंगी जिन पर उन्होंने टेरिफ चुकाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दावों का रिफंड 60 से 90 दिनों के भीतर मिलने की संभावना है, हालांकि तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं के कारण इसमें अधिक समय भी लग सकता है।


सरकार अलग-अलग चरणों में रिफंड जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें हाल ही में चुकाए गए टेरिफ भुगतानों को प्राथमिकता दी जाएगी। अमेरिकी वेबसाइट एक्सओस के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए रिफंड पोर्टलों की शुरुआत ट्रंप प्रशासन का पहला कदम है। अदालती फाइलिंग से पता चलता है कि 3300 से अधिक आयातकों ने 53 मिलियन से अधिक शिपमेंट पर अनुमानित 166 बिलियन डॉलर का टेरिफ चुकाया था।


भारत के व्यापारियों की स्थिति

भारतीय मुद्रा में 166 बिलियन डॉलर का मूल्य लगभग 1545794 करोड़ है। हालांकि, अमेरिकी सरकार सभी दावों की बारीकी से जांच कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या भारतीय व्यापारी इस रिफंड के हकदार हैं? मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के एक्सपोर्टर्स इस टेरिफ रिफंड के सीधे हकदार नहीं हैं। यह रिफंड केवल उन अमेरिकी कंपनियों या यूनिट्स को दिया जाएगा जो यूएस कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के पास एंट्री फाइल करते थे और टेरिफ का सीधा भुगतान करते थे। भारत से सामान निर्यात करने वाले अधिकांश व्यापारी एफओबी या सीआईएफ टर्म पर शिपमेंट करते हैं, जिसमें अमेरिकी खरीदार ही आयातक के रूप में दर्ज होते हैं। इस प्रकार, टेरिफ का बोझ अमेरिकी इंपोर्टर पर पड़ता था।