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डीके शिवकुमार का आध्यात्मिक गुरु: गंगाधर अजजय्या की कहानी

डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिसमें उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु गंगाधर अजजय्या का नाम लिया। गंगाधर अजजय्या 13वीं सदी के एक सम्मानित संत हैं, जो कर्नाटक के तुमकूरु जिले के प्रसिद्ध मठ से जुड़े हैं। इस लेख में जानें कि कैसे डीके शिवकुमार ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों में इस मठ का आशीर्वाद लिया और गंगाधर अजजय्या की भूमिका उनके जीवन में क्या है।
 

डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ


आज कर्नाटक को नया मुख्यमंत्री मिला है। सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद, डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उन्हें पद और गोपनिया की शपथ दिलाई। इस अवसर पर, डीके शिवकुमार ने संविधान के साथ-साथ अपने आध्यात्मिक गुरु गंगाधर अजजय्या के नाम पर भी शपथ ली।


गंगाधर अजजय्या: 13वीं सदी के संत

गंगाधर अजजय्या, जो कर्नाटक के तुमकूरु जिले के नोविनकेरे में स्थित श्री कडासिद्धेश्वर मठ से जुड़े हुए हैं, 13वीं सदी के एक अत्यधिक सम्मानित संत हैं। डीके शिवकुमार लंबे समय से इस मठ के अनुयायी रहे हैं और उन्हें अपना सबसे बड़ा आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानते हैं। यह मठ, जो तिप्तूर तालुक में स्थित है, एक प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र है।


कर्नाटक के नेताओं का प्रिय धार्मिक स्थल

स्थानीय रूप से इस मठ को अज्जय्याना मठ के नाम से जाना जाता है। यह कर्नाटक के प्रमुख राजनेताओं का पसंदीदा धार्मिक केंद्र है। डीके शिवकुमार सहित कई लोग इस मठ के भक्त हैं और अपने महत्वपूर्ण निर्णयों के समय यहां आशीर्वाद लेने आते हैं।


शपथ ग्रहण समारोह में गंगाधर अजजय्या को श्रद्धांजलि

डीके शिवकुमार ने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गंगाधर अजजय्या के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। शपथ लेते समय उनके हाथ में संविधान की किताब थी। उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए अज्जय्या मठ के वर्तमान प्रमुख डॉ. करिवृषभा शिवयोगेश्वर से मार्गदर्शन लिया।