डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क के फैसले से मोदी का वैश्विक कद बढ़ा
मोदी की वैश्विक स्थिति में मजबूती
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और दुनिया के सबसे अमीर व्यवसायी एलन मस्क के निर्णयों ने अनजाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को काफी मजबूत किया है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि अमेरिका की दबाव की रणनीति भारत के लिए पूरी तरह से विफल रही है। यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में निर्णय नहीं लेता, जबकि घरेलू विपक्ष पर अक्सर विदेश नीति में दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगते रहे हैं। एलन मस्क के बयानों ने यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक आर्थिक दबदबा भारत की संप्रभुता के सामने बेअसर है। मस्क का 'स्टारलिंक' प्रोजेक्ट श्रीलंका में 67 दिनों और भूटान में 35 दिनों में प्रवेश कर गया था, लेकिन भारत में स्थिति अलग रही। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित किया। यह विडंबना है कि मुख्य विपक्षी दल, जो पहले स्टारलिंक का विरोध कर रहा था, अब उसी सेवा का समर्थन कर रहा है।
ट्रंप की भू-राजनीतिक रणनीतियों का प्रभाव
डोनाल्ड ट्रंप की भू-राजनीतिक नीतियों ने कई मोर्चों पर उलटा असर डाला है। पश्चिम एशिया में ईरान के संदर्भ में उठाए गए कदमों के बाद, ट्रंप प्रशासन की नीतियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दिलचस्प यह है कि अमेरिका, जो पहले भारत की रूस के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक साझेदारी पर सवाल उठाता था, अब खुद उसी यथार्थवादी विदेश नीति की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। कुल मिलाकर, अमेरिका की ये परिस्थितियाँ भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और मजबूत नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त रूप में प्रस्तुत कर रही हैं।
ट्रंप का रूस से डीजल खरीदने का निर्णय
डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन, नाटो और यूरोपीय देशों को धोखा देते हुए घोषणा की है कि अमेरिका अब रूस से डीजल खरीदेगा। अमेरिका 2027 तक लगातार रूस से डीजल खरीदने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने कहा कि समझौते के तहत रूस तुरंत 3 लाख टन से अधिक डीजल अमेरिका को देगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन रूसी डीजल अमेरिका भेजा जाएगा। ट्रंप ने यूक्रेन, नाटो और यूरोप को बिना बताए रूस के साथ यह डील की है। पहले अमेरिका ने कहा था कि भारत रूस से तेल खरीदकर युद्ध को फंड कर रहा है। अब अमेरिका खुद रूस से तेल खरीदने जा रहा है।