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डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की आलोचना की

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की आलोचना की है, जब उनके डाक मतपत्रों पर पाबंदी लगाने के प्रयास को खारिज कर दिया गया। उन्होंने न्यायाधीशों के निर्णयों को कट्टरपंथी वामपंथियों के दबाव में लिया गया बताया। ट्रंप ने कहा कि अदालत की अक्षमता और अनिच्छा इतिहास में नकारात्मक रूप से दर्ज होगी। इस विवाद में न्यायमूर्ति नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट और ब्रेट कैवनॉ शामिल हैं, जिन्होंने उनके खिलाफ फैसला सुनाया। ट्रंप ने अदालत के फैसलों को अमेरिका के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बताया।
 

ट्रंप का न्यायालय पर हमला

मंगलवार को, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वर्ष के मध्यावधि चुनावों में डाक मतपत्रों पर प्रतिबंध लगाने के उनके प्रयास को अस्वीकार किए जाने के बाद अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश जो उनके खिलाफ हैं, "वे लोग नहीं हैं जिनका मैंने साक्षात्कार लिया था।" ट्रंप प्रशासन ने अंतिम क्षणों में यह सुनिश्चित करने की कोशिश की थी कि डाक मतपत्र प्राप्त करने के लिए पात्रता का निर्धारण अमेरिकी डाक सेवा (यूएसपीएस) की केंद्रीय भूमिका हो। हालांकि, राज्य चुनाव अधिकारियों ने तर्क दिया कि तीन नवंबर के चुनावों के लिए बदलाव करने का समय नहीं है।


अदालत का निर्णय

ट्रंप ने यह भी बताया कि मौजूदा व्यवस्थाएं पहले से ही सुरक्षित और सटीक हैं। सोमवार रात को अदालत ने आपात आदेश में यह निर्णय सुनाया कि ये प्रतिबंध इस साल के चुनावों के लिए अदालत में टिकने योग्य नहीं हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, "अदालत की सही काम करने में अक्षमता और अनिच्छा इतिहास में नकारात्मक रूप से दर्ज होगी।"


कट्टरपंथी वामपंथियों का दबाव

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय कट्टरपंथी वामपंथियों के दबाव में आकर ऐसे निर्णय ले रहा है, जिन्होंने अमेरिका को कम से कम एक सदी पीछे धकेल दिया है। न्यायमूर्ति नील गोरसच, एमी कोनी बैरेट और ब्रेट कैवनॉ को ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में नामित किया था, लेकिन सोमवार के निर्णय में इन सभी ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया। ट्रंप ने कहा, "ये वे लोग नहीं हैं जिनका मैंने अमेरिका के उच्चतम न्यायालय में सेवा के लिए साक्षात्कार लिया था, वे अपने मूल स्वरूप की महज एक छाया भर रह गए हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि अदालत "बेहद खराब फैसलों के जरिए अमेरिका को खरबों डॉलर का नुकसान पहुंचा रही है, जिसका प्रभाव इतना व्यापक है कि हमारे देश के लिए इससे उबरना या इसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।"