तमिलनाडु और केरल के मुख्यमंत्रियों ने दिखाई एकता की मिसाल
मुख्यमंत्रियों की सकारात्मक पहल
तमिलनाडु और केरल के मुख्यमंत्रियों ने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। हाल ही में जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, उनमें पश्चिम बंगाल और असम में राजनीतिक माहौल ऐसा है कि जैसे दोनों पक्ष एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हों। चुनाव परिणामों के बाद भाजपा नेताओं ने विपक्ष की अनदेखी की, जबकि विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विपक्ष का कोई नेता न तो शुभेंदु अधिकारी की शपथ ग्रहण समारोह में गया और न ही हिमंत बिस्व सरमा की शपथ में। इसके बावजूद, शपथ लेने के बाद विपक्ष के कई नेता एक-दूसरे से मिले। उन्होंने एमके स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन से बातचीत की और वाइको से भी मिले।
मुख्यमंत्री विजय ने एक ऐसा उदाहरण पेश किया, जो पहले कभी नहीं देखा गया। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने विपक्ष के प्रति सद्भाव का संदेश दिया। तमिलनाडु की राजनीति में एक समय ऐसा था जब करुणानिधि ने जयललिता को जेल भेजा था, और जयललिता की पुलिस ने करुणानिधि और मुरासोली मारन को गिरफ्तार किया था। लेकिन विजय ने इस परिदृश्य को बदल दिया है। वहीं, केरल में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने भी एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कांग्रेस विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद निवर्तमान मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन से मिलने उनके घर गए। दोनों की हंसते-मुस्कुराते तस्वीरें और वीडियो साझा किए गए। यह लोकतंत्र की एक खूबसूरत छवि है, जो दर्शाती है कि राजनीतिक दल एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी होते हैं, शत्रु नहीं। ये तस्वीरें यह भी स्पष्ट करती हैं कि चुनाव हारने का मतलब जीवन का अंत नहीं होता।