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तमिलनाडु में टीवीके को मिला वामपंथी दलों का समर्थन, विजय की मुख्यमंत्री बनने की संभावना

तमिलनाडु में कांग्रेस के समर्थन के बाद, सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके ने टीवीके को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इस स्थिति में, अभिनेता विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग निश्चित प्रतीत होता है। टीवीके प्रमुख ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है, जबकि डीएमके ने कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद लोकसभा में सीटों के पुनर्व्यवस्थापन की मांग की है। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
 

टीवीके प्रमुख ने राज्यपाल से मिलने का अनुरोध किया


तमिलनाडु में कांग्रेस के समर्थन के बाद, सीपीआई, सीपीआई (एम) और वीसीके ने टीवीके को समर्थन देने का निर्णय लिया है। इन दोनों वामपंथी दलों के पास विधानसभा में दो-दो विधायक हैं। टीवीके को पहले ही कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन प्राप्त हो चुका है।


सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीपीआई के महासचिव डी राजा से बातचीत की है, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु में एक सेक्युलर सरकार बनाने के लिए टीवीके को समर्थन देने की अपील की है। इसके साथ ही, वीसीके के चार विधायकों का समर्थन भी टीवीके को मिल गया है। इस स्थिति में, अभिनेता विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग निश्चित प्रतीत होता है। टीवीके के प्रमुख ने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मिलने का समय भी मांगा है।


डीएमके और एआईएडीएमके के बीच संभावित गठबंधन पर टीवीके का प्रदर्शन

गवर्नर ने पहले विजय को यह कहकर लौटा दिया था कि उन्हें सरकार चलाने के लिए आवश्यक 118 विधायकों का समर्थन लाना होगा। अब यह संख्या 118 होने का दावा किया जा रहा है। इसी बीच, डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन की खबरें भी आई हैं।


टीवीके ने स्पष्ट किया है कि यदि दोनों द्रविड़ पार्टियां सरकार बनाने का दावा पेश करती हैं, तो पार्टी के सभी विधायक इस्तीफा दे देंगे। टीवीके के समर्थकों ने शुक्रवार को गवर्नर हाउस के सामने प्रदर्शन किया, जिसके दौरान पुलिस ने कई समर्थकों को हिरासत में लिया।


कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद डीएमके की नई मांग

कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद, डीएमके ने लोकसभा में अपने सांसदों की सीटों को पुनर्व्यवस्थित करने की मांग की है। डीएमके की उप महासचिव और तूतीकोरिन सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने 7 मई 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए, कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन समाप्त हो गया है। ऐसे में सदन में उनके साथ बैठने की व्यवस्था बनाए रखना उचित नहीं होगा।