तमिलनाडु में पेंशन योजना: क्या सरकारी कर्मचारियों को विशेष लाभ मिलना चाहिए?
पेंशन योजना का उद्देश्य
बुजुर्गों को पेंशन प्रदान करना एक कल्याणकारी विचार है, लेकिन यह सवाल उठता है कि यह सुविधा केवल सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित क्यों होनी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों को विशेष वर्ग के रूप में मान्यता देने के प्रयासों के नकारात्मक परिणाम पहले भी देखे जा चुके हैं।
असम और तमिलनाडु की योजनाएँ
बिहार की तरह, असम सरकार ने भी विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में धन हस्तांतरित करने की योजना की घोषणा की है। इसे मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता योजना कहा जाएगा, जिसके तहत 37 लाख महिलाओं को 8000 रुपये दिए जाएंगे। इससे राज्य के खजाने पर लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसी तरह, तमिलनाडु में भी चुनाव से पहले सरकारी कर्मचारियों को लुभाने के लिए एक योजना बनाई गई है। तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम के तहत, रिटायर होने वाले हर सरकारी कर्मचारी को अपने अंतिम वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में मिलेगा।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की चुनौतियाँ
इस योजना के लिए कर्मचारियों को केवल 10 प्रतिशत योगदान देना होगा, जबकि बाकी का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। रिटायर होने वाले कर्मचारियों को 25 लाख रुपये तक की ग्रैच्युटी भी मिलेगी। इन योजनाओं से राज्य सरकार पर 13 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। चूंकि पेंशन की राशि महंगाई के अनुसार बढ़ेगी, यह खर्च हर साल बढ़ता जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस प्रयास से सत्ताधारी डीएमके को चुनावी लाभ मिलेगा, लेकिन जो वित्तीय दायित्व बनेगा, उसका बोझ भविष्य की सभी सरकारों को उठाना होगा।
सामाजिक सुरक्षा का व्यापक दृष्टिकोण
बुजुर्गों को पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना एक सकारात्मक सोच है, लेकिन यह केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित क्यों रहना चाहिए? सरकारी कर्मचारियों को विशेष वर्ग के रूप में मान्यता देने के प्रयासों के नकारात्मक परिणाम पहले भी सामने आ चुके हैं। तमिलनाडु सरकार इस दिशा में कदम उठाने जा रही है, जो चुनावी दृष्टिकोण से समस्याग्रस्त है। बेहतर होगा कि समाज के सभी वर्गों को न्यूनतम सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में प्रयास किए जाएं। आखिरकार, सरकारी कर्मचारी भी समाज का हिस्सा हैं। उन्हें अलग वर्ग में रखकर राजनीतिक दल एक गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं।