तमिलनाडु में भाजपा की चुनावी चुनौतियाँ: सीटों का विवाद
भाजपा का गठबंधन और सीटों की समस्या
तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मैदान में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए हैं। पार्टी ने ई पलानीस्वामी के नेतृत्व में कई नेताओं के विरोध के बावजूद एनडीए में शामिल होकर एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश की है, जिसका उद्देश्य डीएमके और कांग्रेस को चुनौती देना है। हालांकि, भाजपा को अपनी पसंद की सीटें नहीं मिल पाईं। पूर्व मुख्यमंत्री और अन्ना डीएमके के नेता ई पलानीस्वामी ने भाजपा के लिए सीटों का चयन कठिन बना दिया।
भाजपा को पिछली बार की 20 सीटों की तुलना में इस बार 27 सीटें मिली हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश सीटें उनकी पसंद की नहीं हैं। भाजपा कोयम्बटूर में तीन सीटें चाहती थी, जिसमें से एक सिन्गनालूर सीट भी शामिल थी, जहां पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन अन्ना डीएमके ने यह सीट नहीं छोड़ी और भाजपा को केवल एक सीट दी।
भाजपा ने शहरी क्षेत्रों, विशेषकर राज्य के पश्चिमी हिस्से में भी सीटों की मांग की थी, लेकिन अन्ना डीएमके ने इसे अस्वीकार कर दिया। अंबुमणि रामदॉस की पीएमके को 18 सीटें और जीके वासन की तमिल मनीला कांग्रेस को सात सीटें मिली हैं, लेकिन सभी सीटों का चयन पलानीस्वामी ने अपने अनुसार किया है। अन्ना डीएमके खुद 169 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।