तमिलनाडु में राजनीतिक उथल-पुथल: TVK प्रमुख विजय को फिर से नहीं मिला न्योता
राजभवन के बाहर प्रदर्शन
नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति में इन दिनों काफी हलचल देखने को मिल रही है। TVK के नेता विजय ने गुरुवार को राजभवन का दौरा किया, लेकिन उन्हें फिर से सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। इस घटना ने उनके समर्थकों के बीच गुस्से को जन्म दिया, जिन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल जानबूझकर देरी कर रहे हैं और भाजपा के पक्ष में हैं।
विजय ने दावा किया है कि उनके पास 112 विधायकों का समर्थन है, जिसमें कांग्रेस के विधायक भी शामिल हैं। इसके बावजूद, उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। इस पर नाराज कार्यकर्ताओं ने चेन्नई में राजभवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि बहुमत साबित करने का सही स्थान विधानसभा है, न कि राजभवन। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध एस.आर. बोम्मई मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि फ्लोर टेस्ट ही सही तरीका है और राज्यपाल को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। समर्थकों का तर्क है कि 108 विधायकों के साथ TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, इसलिए संविधान के अनुसार राज्यपाल को विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं।
एक समाचार एजेंसी के अनुसार, राज्यपाल ने विजय को आश्वासन दिया है कि वह किसी अन्य पार्टी को सरकार बनाने का निमंत्रण नहीं देंगे। हालांकि, इसके लिए एक प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता है। राज्यपाल का कहना है कि विजय को अपने समर्थक विधायकों के हस्ताक्षर वाली सूची लेकर दोबारा आना होगा। जब तक सभी विधायकों के हस्ताक्षर वाली सूची जमा नहीं होती, तब तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि समर्थन का दावा कागजों पर पूरी तरह से पक्का होना चाहिए।
इस बीच, प्रदर्शन तेज हो गया और पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। तिरुपुर से आए कार्यकर्ता काफी गुस्से में थे और उनका कहना था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने निर्णय लिया है कि जब तक शपथ ग्रहण नहीं होता, वे चेन्नई में ही रहेंगे। उनका कहना है कि वे अपने नेता को मुख्यमंत्री बनते देखकर ही वापस जाएंगे।