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तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ती दूरियां

तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ती दूरियों पर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली में विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के दलों के बीच इस मुद्दे पर विचार-विमर्श चल रहा है। डीएमके के एक नेता ने कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस इसे खारिज कर रही है। जानें इस राजनीतिक हलचल के पीछे की सच्चाई और इसके संभावित प्रभाव।
 

दिल्ली में राजनीतिक चर्चाएं

तमिलनाडु में उठ रहे सवालों पर चर्चा का केंद्र दिल्ली बन गया है। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के दलों के बीच इस मुद्दे पर विचार-विमर्श और बयानबाजी चल रही है। कुछ दल मौन हैं, जबकि अन्य खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। चेन्नई में डीएमके के एक नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उनके साथ विश्वासघात किया है। हालांकि, कांग्रेस इस आरोप को खारिज कर रही है।


कांग्रेस का कहना है कि 2014 तक डीएमके उनके साथ केंद्र की सरकार में शामिल रहा। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले, डीएमके ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया। कांग्रेस इसे विश्वासघात नहीं मानती। यदि कांग्रेस अगली लोकसभा चुनाव में डीएमके से अलग होकर चुनाव लड़ने का निर्णय लेती है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।


डीएमके और टीवीके का समर्थन

कांग्रेस का यह भी कहना है कि डीएमके से अलग होकर टीवीके को समर्थन देने का निर्णय डीएमके को नुकसान नहीं पहुंचाएगा। दरअसल, डीएमके सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है। यदि कांग्रेस के समर्थन से डीएमके की सरकार बनती और फिर कांग्रेस उसे छोड़ देती, तो इसे धोखा कहा जाता। लेकिन वर्तमान में स्थिति अलग है।


कांग्रेस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह डीएमके के साथ पूरी तरह से नहीं है। प्रदेश कांग्रेस के नेता, विशेषकर सांसद मणिक्कम टैगोर, विजय के साथ तालमेल बनाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे ने पुराने संबंधों का हवाला देकर डीएमके के साथ तालमेल किया। यदि उस समय कांग्रेस और टीवीके एक साथ चुनाव लड़ते, तो कांग्रेस राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती थी। इसलिए, भले ही 'इंडिया' ब्लॉक की पार्टियां नाराज हों, कांग्रेस पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।