×

तमिलनाडु में राजनीतिक हलचल: विधायकों की शर्तें और पार्टी की एकता

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के पद ग्रहण के बाद राजनीतिक दलों में विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस ने डीएमके से दूरी बना ली है, जबकि अन्ना डीएमके में भी फूट देखने को मिली है। नाराज विधायकों ने शर्त रखी है कि दिवंगत नेता जयललिता की करीबी सहयोगी वीके शशिकला और उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण को पार्टी में शामिल किया जाए। जानें इस राजनीतिक संकट के पीछे की कहानी और पलानीस्वामी की स्थिति पर इसका प्रभाव।
 

तमिलनाडु में राजनीतिक संकट


तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के पद ग्रहण के बाद से सभी राजनीतिक दलों में विवाद और असहमति की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कांग्रेस ने डीएमके से दूरी बना ली है, जबकि अन्ना डीएमके में भी फूट देखने को मिली है। इस दौरान, आधा दर्जन विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पहले तो लगभग 20 विधायक पार्टी से अलग हो गए थे, लेकिन बाद में वे वापस लौट आए। फिर भी, इन विधायकों के नेता पार्टी की एकता के लिए एक शर्त रख रहे हैं।


सीवी षणमुगम और वेलुमनि, नाराज विधायकों के नेता, ने यह शर्त रखी है कि दिवंगत नेता जयललिता की करीबी सहयोगी वीके शशिकला को पार्टी में शामिल किया जाए। इसके साथ ही, उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण को भी पार्टी में शामिल करना होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि दिनाकरण और शशिकला ने पहले अलग पार्टी बनाई थी और इनका पार्टी में महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। यदि ये दोनों पार्टी में लौटते हैं, तो पलानीस्वामी की स्थिति कमजोर हो सकती है।


हालांकि, पलानीस्वामी के लिए एक सकारात्मक बात यह है कि ओ पनीरसेल्वम की वापसी की कोई चर्चा नहीं हो रही है, जो चुनाव से पहले डीएमके से जुड़ गए थे।