×

तारिक रहमान ने जन्माष्टमी पर शेख हसीना की की तुलना कंस से

बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने जन्माष्टमी के अवसर पर शेख हसीना पर तीखा हमला किया, उन्हें कंस से तुलना करते हुए कहा कि उन्होंने बांग्लादेश के लोगों को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा। रहमान ने इस अवसर पर बांग्लादेश और विश्वभर के हिंदुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर भी अपने विचार साझा किए, जिसमें लोकतंत्र की बहाली की बात की गई।
 

तारिक रहमान का बयान

नई दिल्ली: बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने जन्माष्टमी के अवसर पर एक कार्यक्रम में शेख हसीना पर तीखा हमला किया। उन्होंने हसीना की तुलना मथुरा के दुष्ट राजा कंस से करते हुए कहा कि कंस जैसे शासक ने बांग्लादेश के नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित रखा। रहमान ने कहा कि अंततः लोग एकजुट हुए और 'कंस जैसे तानाशाही शासन' को समाप्त किया। इस कार्यक्रम का आयोजन ढाका में हुआ, जहां बांग्लादेशी पीएम ने हिंदू पुजारियों से मुलाकात की और समुदाय के सदस्यों को सम्मान राशि भी प्रदान की।


बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, यह कार्यक्रम धार्मिक मामलों के मंत्रालय और हिंदू धार्मिक कल्याण ट्रस्ट द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें रहमान को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने उस्मानिया मेमोरियल ऑडिटोरियम तक पैदल यात्रा की। इस अवसर पर, रहमान ने बांग्लादेश और विश्वभर के हिंदुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।


शेख हसीना पर अप्रत्यक्ष हमला

रहमान ने बिना नाम लिए शेख हसीना पर निशाना साधा। उन्होंने भगवान कृष्ण के जन्म की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 5000 साल पहले मथुरा में कंस का शासन था। हिंदू मान्यता के अनुसार, श्री कृष्ण ने कंस को हराकर बुराई का अंत किया। रहमान ने इस कहानी को बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि कंस जैसे शासक ने 15 वर्षों तक बांग्लादेश पर शासन किया।


उन्होंने कहा कि अब बांग्लादेश फिर से लोकतंत्र की ओर बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था में सुधार, निष्पक्ष प्रशासन और बेहतर कानून-व्यवस्था के साथ, देश के पुनर्निर्माण का समय आ गया है।


गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद शेख हसीना भारत में रह रही हैं। इस दौरान बांग्लादेश की राजनीति में कई बदलाव आए हैं। हसीना की सत्ता जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने सत्ता संभाली। हसीना की पार्टी पर बैन लगा दिया गया है। इसके बाद बांग्लादेश में हुए आम चुनावों में रहमान की बीएनपी ने बहुमत हासिल किया।