तालिबान और यूरोप के बीच ऐतिहासिक बैठक: क्या है इसके पीछे की कहानी?
ब्रसेल्स में तालिबान का डेलीगेशन
जिस तालिबान के खिलाफ अमेरिका और नाटो देशों ने दो दशकों तक संघर्ष किया, आज वही तालिबान ब्रसेल्स में यूरोप के नेताओं के साथ बातचीत कर रहा है। यह एक ऐतिहासिक पल है, जिसने वैश्विक समुदाय को चौंका दिया है। इस बैठक में यूरोपीय संघ और तालिबान के बीच एक गुप्त वार्ता हुई, जो केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं थी। यहां शर्तों का एक नया खेल शुरू हुआ, जिसमें एक ओर यूरोप की सहायता की पेशकश थी, वहीं दूसरी ओर तालिबान की कट्टरपंथी नीतियों का सामना। ब्रसेल्स, जो नाटो का मुख्यालय है, वहां तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने बैठक का नेतृत्व किया। इस बैठक में ईयू के 15 सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। लेकिन सवाल यह है कि यूरोप को तालिबान की आवश्यकता क्यों पड़ी और तालिबान यूरोप तक कैसे पहुंचा?
यूरोप की शर्तें
यूरोपीय संघ ने तालिबान को स्पष्ट कर दिया है कि यदि उन्हें आर्थिक सहायता या अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहिए, तो उन्हें अपनी कट्टरपंथी नीतियों में बदलाव करना होगा। यूरोप की प्रमुख शर्तों में महिलाओं की स्थिति में सुधार, मानवाधिकारों की रक्षा, और शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी शामिल हैं। यूरोप को चिंता है कि यदि अफगानिस्तान में स्थिति और बिगड़ती है, तो शरणार्थियों का एक बड़ा सैलाब यूरोप की ओर बढ़ सकता है, जिसे संभालना उनके लिए कठिन होगा।
तालिबान की मांगें
तालिबान के प्रवक्ता अब्दुल कहर बलखी ने बैठक के बाद कहा कि वे कूटनीतिक संबंधों को सामान्य बनाना चाहते हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग यह है कि यूरोपी देश काबुल में अपने दूतावासों को फिर से खोलें। तालिबान जानता है कि यदि यूरोप के दूतावास काबुल में खुलते हैं, तो उन्हें अघोषित मान्यता मिल जाएगी। यह नाटो देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वे मानवाधिकारों की बात करते हैं, जबकि तालिबान उन्हें कूटनीतिक जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा है।
मलाला का बयान
इस बीच, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ जई ने यूरोप के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यूरोप को उस सत्ता को मान्यता नहीं देनी चाहिए, जिसने मानवाधिकारों का सबसे क्रूर उल्लंघन किया है। मलाला का यह बयान उन यूरोपीय देशों के लिए एक चेतावनी है, जो केवल अपने फायदे के लिए तालिबान के साथ बातचीत कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचारों के लिए अपडेट रहें
Stay updated with International News in Hindi https://www.prabhasakshi.com/international on Prabhasakshi