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तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मक्का रक्षा समझौते की पहली बैठक

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने मक्का रक्षा समझौते की पहली बैठक आयोजित की। इस बैठक में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा हमला किया गया। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने नेतन्याहू की नीतियों को वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया। बैठक में सामूहिक रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर चर्चा की गई, जिसमें तीनों देशों ने एकजुटता का संकल्प लिया।
 

मक्का रक्षा समझौते की पहली रणनीतिक बैठक

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मक्का रक्षा समझौते की पहली रणनीतिक बैठक सोमवार को इस्तांबुल में आयोजित की गई। इस बैठक में तीनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ-साथ सैन्य प्रमुख भी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षा सहयोग, सैन्य समन्वय और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना था। इस दौरान, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इजराइल और उसके प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर तीखा हमला किया। फिदान ने नेतन्याहू को वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कहा कि उनकी विचारधारा केवल तुर्की के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ तुर्की की समस्या मानना एक बड़ी गलती होगी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नेतन्याहू के खतरे के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। 


नेतन्याहू की नीतियों पर फिदान की आलोचना

फिदान ने यह भी कहा कि नेतन्याहू की नीतियां इजराइल के यहूदी समुदाय और पूरी दुनिया के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और क्षेत्र में चल रहे कब्जे को समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं। फिदान के अनुसार, वर्तमान नीतियां क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ा रही हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तुर्की और इजराइल के बीच संबंधों में लगातार तनाव बढ़ रहा है। इससे पहले, अप्रैल 2026 में, फिदान ने इजराइल पर सुरक्षा के नाम पर क्षेत्र में कब्जा बढ़ाने का आरोप लगाया था और नेतन्याहू सरकार को वैश्विक समस्या बताया था। इस्तांबुल बैठक के बाद, फिदान ने स्पष्ट किया कि मक्का रक्षा गठबंधन किसी एक देश के खिलाफ नहीं है। इस गठबंधन का आधार देशों की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का सिद्धांत है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के अन्य देश निर्धारित शर्तों और मानकों के तहत इसमें शामिल हो सकते हैं। 


सामूहिक रक्षा सहयोग की दिशा में कदम

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच नई रणनीति धुरी के तहत, 7 अगस्त को मक्का में हुए समझौते के अनुसार, तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इस समझौते में एक देश पर सशस्त्र हमले की स्थिति में इसे तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। अब इस्तांबुल की पहली बैठक में साझेदारी को स्थायी रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। तीनों देशों ने रक्षा उद्योग, सैन्य तकनीक, हथियारों के उत्पादन और सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने पर सहयोग की दिशा तय की है। सऊदी अरब में इस गठबंधन के लिए एक सचिवालय स्थापित किया जाएगा और प्रारंभिक तीन वर्षों के लिए महासचिव पाकिस्तान से होगा। इस प्रकार, मक्का डिफेंस अलायंस क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक नए ढांचे के रूप में उभर रहा है, जबकि इसी मंच से तुर्की ने इजराइल और नेतन्याहू के खिलाफ अपना सबसे सख्त संदेश दिया है।