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तृणमूल कांग्रेस में नया मोड़: निर्वाचन आयोग ने दिए नए नाम और चुनाव चिह्न

तृणमूल कांग्रेस में चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच निर्वाचन आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न मिला है, जबकि बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'लिफाफा' चिह्न दिया गया है। यह नया मोड़ आगामी चुनावों की गतिविधियों को और तेज कर रहा है। जानें इस मामले में और क्या हो रहा है।
 

नई राजनीतिक दिशा


नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच, निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के बाद यह कदम उठाया गया है। ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम के साथ 'फुटबॉल खिलाड़ी' चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'लिफाफा' चिह्न मिला है।


नए नियमों का प्रभाव

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अंतरिम व्यवस्था सभी कानूनी आवश्यकताओं और नियमों की पूर्ति के बाद ही लागू होगी। तृणमूल कांग्रेस के भीतर चिह्न को लेकर यह नया मोड़ आगामी चुनावों की गतिविधियों को और तेज कर रहा है, जहां दोनों गुट अपने नए नाम और चिह्नों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं।


उम्मीदवारों की मान्यता

चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार, ममता बनर्जी द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी के तहत दाखिल नामांकन पत्रों को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के तहत मान्यता दी जाएगी। इनमें रबीउल आलम चौधरी, नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और असम की नगांव सीट से अब्दुल सलाम शामिल हैं, जिन्हें 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न पर चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है। दूसरी ओर, अरूप रॉय द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी के आधार पर नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' का उम्मीदवार माना जाएगा। इस बागी गुट के तहत सफिउज्जमान शेख और नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से एहतेशमुल हक के नामांकन को 'लिफाफा' चिह्न के उम्मीदवार के रूप में दर्ज किया जाएगा।


निर्वाचन अधिकारियों के लिए निर्देश

निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। आयोग ने पश्चिम बंगाल की 70-रेजीनगर और 210-नंदीग्राम विधानसभा सीटों तथा असम की 9-नगांव लोकसभा सीट के रिटर्निंग अफसरों को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहाल द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी और वैधता की जांच लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 36 के तहत की जाएगी।