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तृणमूल कांग्रेस में सियासी उथल-पुथल: सांसदों के अलग गुट की मांगें

तृणमूल कांग्रेस में चल रही सियासी उथल-पुथल ने एक नए मोड़ ले लिया है, जब सांसदों के एक गुट ने अलग पहचान और विलय की मांग की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी पक्षों को सुनने का आश्वासन दिया है। इस स्थिति का प्रभाव संसद और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ सकता है। जानें इस मुद्दे की गहराई और ममता बनर्जी के समक्ष आने वाली चुनौतियों के बारे में।
 

कोलकाता में सियासी हलचल


कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह स्पष्ट किया है कि पार्टी से अलग हुए सांसदों के भविष्य पर निर्णय सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा। इस बीच, टीएमसी के एक बड़े गुट ने अपनी अलग पहचान बनाने और अन्य राजनीतिक दल में विलय की मांग की है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। आने वाले समय में इस मुद्दे का प्रभाव संसद और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।


लोकसभा में सियासी गतिविधियों में वृद्धि

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों के एक समूह ने हाल ही में अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और अपने समूह को अलग मान्यता देने की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में विलय का अनुरोध भी किया है। सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष कार्यालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट को भी अपनी बात रखने के लिए बुलाया है। अध्यक्ष किसी भी निर्णय से पहले दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी सलाह भी ली जा सकती है। यह माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र से पहले इस मामले पर कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।


बंगाल विधानसभा में संकट की स्थिति

तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद केवल संसद तक सीमित नहीं हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी के भीतर एक अलग धड़ा सक्रिय हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 64 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। विधानसभा स्तर पर हुए इस बदलाव को पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह स्थिति आगे बढ़ती है, तो इसका असर राज्य की सत्ता और विपक्ष दोनों की रणनीतियों पर पड़ सकता है।


ममता बनर्जी के समक्ष नई चुनौतियाँ

लोकसभा में अलग हुए सांसदों के समूह का नेतृत्व काकोली घोष दस्तिदार कर रही हैं। दूसरी ओर, पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस गुट को मान्यता न देने की अपील की है। काकोली पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि उनका गुट भाजपा नीत एनडीए का समर्थन करेगा। वहीं, राज्यसभा में चार टीएमसी सांसदों के इस्तीफे ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस बीच, पार्टी के चुनाव चिह्न और संगठनात्मक संपत्तियों को लेकर भी विवाद गहरा सकता है। टीएमसी के पूर्व करीबी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने स्पष्ट किया है कि अध्यक्ष के निर्णय के बाद उनका गुट कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।