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तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने 21 वर्ष की उम्र में चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने चुनाव लड़ने की उम्र को 21 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि जेन-जी की जनसंख्या का 30 प्रतिशत से अधिक होने के बावजूद उनका लोकसभा में प्रतिनिधित्व 1 प्रतिशत से भी कम है। रेड्डी ने तर्क दिया कि यदि युवा IAS अधिकारी बन सकते हैं, तो उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए। जानें इस मुद्दे पर उनके विचार और कांग्रेस का इतिहास।
 

चुनाव लड़ने की उम्र में बदलाव की मांग

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सफल आंदोलन के बाद, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया गया, जेन-जी (Gen-Z) को चुनावी राजनीति में लाने की तैयारी की जा रही है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने शनिवार को इस विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि चुनाव लड़ने की उम्र को 21 वर्ष करने का समय आ गया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाकर इस प्रस्ताव को पारित करेगी और केंद्र सरकार से अनुरोध करेगी कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए न्यूनतम उम्र को 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष किया जाए।


मुख्यमंत्री रेड्डी ने हैदराबाद में आयोजित एक कैंडल मार्च में कहा कि जेन-जी ने अपने आंदोलन के माध्यम से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।


जेन-जी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता


रेड्डी ने बताया कि जेन-जी भारतीय जनसंख्या का 30 प्रतिशत से अधिक हैं, लेकिन लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व 1 प्रतिशत से भी कम है। उन्होंने कहा, "हम अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुलाएंगे। हम इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और प्रधानमंत्री को प्रस्ताव भेजेंगे।"


तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यदि 21 वर्ष का युवा IAS अधिकारी बन सकता है और स्थानीय चुनाव लड़ सकता है, तो उसे चुनाव लड़ने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि युवा मंत्री बनते हैं, तो देश का भविष्य बदल सकता है।


कांग्रेस का इतिहास


रेड्डी ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पहले भी राजनीतिक उम्र को कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का उदाहरण दिया, जिन्होंने वोटिंग की उम्र को 21 से घटाकर 18 वर्ष किया था। इसके बाद, पीवी नरसिम्हा राव ने युवाओं को स्थानीय चुनावों में भाग लेने की अनुमति दी थी। उन्होंने यह भी बताया कि जर्मनी, सिंगापुर और यूके जैसे देशों में भी कम उम्र के युवाओं को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाता है।