थान्या नाथन: दृष्टिबाधित जज बनने की प्रेरणादायक कहानी
नई दिल्ली में थान्या नाथन की सफलता
नई दिल्ली: कठिनाइयाँ अक्सर लोगों के आत्मविश्वास को तोड़ देती हैं, लेकिन इतिहास वही बनाते हैं जो चुनौतियों को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल देते हैं। केरल के कन्नूर जिले की थान्या नाथन सी ने ऐसा ही किया है। जन्म से 100% दृष्टिहीन होने के बावजूद, थान्या ने केरल ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा 2025 में सफलता प्राप्त कर देश की पहली महिला दृष्टिबाधित जज बनने का गौरव हासिल किया है। उनकी यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि लक्ष्य प्राप्त करने के लिए केवल दृष्टि की आवश्यकता नहीं, बल्कि सपनों में जीवंतता होनी चाहिए।
थान्या का संघर्ष और शिक्षा
कन्नूर के मांगड की 24 वर्षीय थान्या का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दृष्टिहीन बच्चों के लिए विशेष स्कूल से शुरू की, लेकिन जल्द ही सामान्य बच्चों के साथ मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ाई करने का निर्णय लिया। 12वीं कक्षा में कानून के प्रति उनकी रुचि जागी, और उन्होंने कन्नूर यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। आश्चर्य की बात यह है कि अपने पूरे बैच में वह एकमात्र दृष्टिहीन छात्रा थीं, फिर भी उन्होंने विश्वविद्यालय में पहले स्थान पर आकर सभी को चौंका दिया।
कोचिंग के बिना वकालत में सफलता
वकालत के साथ बिना कोचिंग पाई सफलता
थान्या ने जज बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए किसी प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। 2024 में वरिष्ठ वकील के.जी. सुनील कुमार के अधीन वकालत करते हुए, उन्होंने आत्म-अध्ययन के माध्यम से यह सफलता प्राप्त की। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान, वह अपने बहस के नोट्स ब्रेल लिपि में तैयार करती थीं। उनकी तैयारी में आधुनिक तकनीक जैसे स्क्रीन-रीडिंग सॉफ्टवेयर और वॉयस-टू-टेक्स ऐप्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वकालत और पढ़ाई को संतुलित करते हुए, उन्होंने केरल न्यायिक सेवा की मेरिट लिस्ट में पहला स्थान प्राप्त किया।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय
सुप्रीम कोर्ट का फैसला बना मील का पत्थर
थान्या की यह ऐतिहासिक सफलता मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय के बाद और भी महत्वपूर्ण हो गई, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दृष्टिहीन उम्मीदवारों को उनकी दिव्यांगता के आधार पर जज बनने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। थान्या अपनी जीत का श्रेय अपनी मेहनत के साथ-साथ इस निर्णय को भी देती हैं।
थान्या की प्रेरणादायक कहानी
यह ध्यान देने योग्य है कि थान्या केरल की पहली पूरी तरह दृष्टिहीन जज हैं, जबकि देश में यह उपलब्धि हासिल करने वाली वे दूसरी व्यक्ति हैं। इससे पहले, 2019 में राजस्थान के ब्रह्मानंद शर्मा देश के पहले दृष्टिहीन जज बने थे। थान्या की कहानी आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी या शारीरिक अक्षमता के कारण हार मान लेते हैं।