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दिग्विजय सिंह का बयान: अनुसूचित जाति और जनजाति के मुख्यमंत्री की मांग

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में कांग्रेस के सत्ता में आने पर अनुसूचित जाति और जनजाति के मुख्यमंत्री की नियुक्ति की मांग की है। इस बयान ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है, और कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। दिग्विजय सिंह के अनुभव और मार्गदर्शन के माध्यम से इस मुद्दे पर राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष पहल की जाएगी। जानें इस बयान के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

दिग्विजय सिंह का बयान

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हालिया बयान ने राज्य में कांग्रेस के सत्ता में आने पर अनुसूचित जाति और जनजाति के मुख्यमंत्री की नियुक्ति की मांग को लेकर चर्चा को जन्म दिया है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को सामाजिक न्याय और दलित उत्थान का समर्थक बताया है।


भोपाल डिक्लेरेशन पर चर्चा

हाल ही में, दिग्विजय सिंह ने भोपाल डिक्लेरेशन के संदर्भ में चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस को अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग का मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को पत्र लिखकर उनके मुख्यमंत्री काल को सामाजिक न्याय और उत्थान के लिए महत्वपूर्ण बताया।


सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता

प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह के संवेदनशील और लोकतांत्रिक बयान के लिए धन्यवाद दिया, यह दर्शाते हुए कि यह बयान सामाजिक न्याय और समावेशी राजनीति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर करता है।


अनुसूचित जाति का प्रतिनिधित्व

अहिरवार ने आगे कहा कि राज्य की लगभग 17 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति की है, और उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा में इस वर्ग का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। यह न केवल सामाजिक संतुलन को बनाए रखेगा, बल्कि दलित समाज के आत्मसम्मान और राजनीतिक भागीदारी को भी बढ़ावा देगा।


दिग्विजय सिंह का भविष्य

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि दिग्विजय सिंह के अनुभव और मार्गदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष इस मुद्दे पर पहल की जाएगी। उल्लेखनीय है कि दिग्विजय सिंह का राज्यसभा का कार्यकाल इस वर्ष अप्रैल में समाप्त हो रहा है, और उन्होंने आगे राज्यसभा में न जाने की इच्छा व्यक्त की है। इस कारण से कांग्रेस के संभावित दावेदारों के नामों पर चर्चा फिर से शुरू हो गई है।