दिग्विजय सिंह ने आदिवासी बालिकाओं की मृत्यु पर प्रशासनिक लापरवाही की निंदा की
दिग्विजय सिंह का शोक और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
राज्यसभा सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने रायसेन जिले के आदिवासी क्षेत्र सगौर में तीन नाबालिग बालिकाओं की कुएं में डूबने से हुई मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही और पेयजल व्यवस्था की विफलता का गंभीर उदाहरण मानते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
नगर पालिका रायसेन में नेता प्रतिपक्ष प्रभात चावला के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने दिग्विजय सिंह को बताया कि ग्राम सगौर में नल जल योजना केवल कागजों पर चल रही है, जबकि वास्तविकता में ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। गर्मियों में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि राधा गौंड (14 वर्ष), तनु गौंड (11 वर्ष) और अम्रता गौंड (11 वर्ष) पानी भरने के लिए कुएं पर गई थीं, जहां उनका पैर फिसल गया और वे डूब गईं। यह घटना क्षेत्र में पेयजल संकट और नल-जल योजनाओं की वास्तविकता को उजागर करती है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह समस्या केवल ग्राम सगौर तक सीमित नहीं है, बल्कि रायसेन जिले के कई दूरदराज के क्षेत्रों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। करोड़ों रुपये खर्च कर चल रही नल-जल योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को पानी की व्यवस्था के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, और पीड़ित परिवारों को राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि तीन मासूम बेटियों की असमय मृत्यु ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए प्रदेशभर में नल-जल योजनाओं और पेयजल व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।