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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: कोयला उद्योगों पर उठे सवाल

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कोयला आधारित उद्योगों को क्षेत्र से बाहर करने का प्रस्ताव रखा है। सुनवाई में अदालत ने केंद्र सरकार से स्पष्ट उत्तर मांगा है और राज्यों को प्रदूषण के मुद्दे पर सार्वजनिक नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस बार कोयला उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करने से यह संकेत मिलता है कि लंबे समय के समाधान की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। जानें इस महत्वपूर्ण सुनवाई के सभी पहलुओं के बारे में।
 

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में प्रदूषण का मुद्दा


नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। 23 फरवरी को हुई सुनवाई में कोयला आधारित उद्योगों को क्षेत्र से बाहर करने का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया गया। अदालत ने केंद्र सरकार से इस मामले में स्पष्ट उत्तर मांगा है।


सुप्रीम कोर्ट की नई सुनवाई का विवरण

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, ने दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण पर चर्चा की। कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की रिपोर्ट पर विचार करते हुए, अदालत ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। मुख्य ध्यान कोयला से चलने वाले उद्योगों और थर्मल पावर प्लांट्स पर केंद्रित रहा।


300 किलोमीटर का प्रस्ताव क्या है?

सुनवाई के दौरान यह सुझाव दिया गया कि दिल्ली से 300 किलोमीटर की दूरी पर कोई नया कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट स्थापित नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, मौजूदा कोयला आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से दिल्ली-एनसीआर से बाहर स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भी रखा गया।


अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय से संयुक्त उत्तर मांगा है। इन मंत्रालयों को यह बताना होगा कि ऐसे उद्योगों को कैसे बाहर किया जा सकता है, वैकल्पिक ईंधन क्या उपलब्ध होंगे और क्या यह संभव है।


राज्यों को जारी नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सरकारों को निर्देश दिया है कि वे कोयला आधारित उद्योगों से होने वाले प्रदूषण के संबंध में सार्वजनिक नोटिस जारी करें। लोगों से राय मांगी जाए कि ऐसे उद्योगों को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। अदालत ने राज्यों से यह भी पूछा कि वे क्या कार्रवाई कर सकते हैं और इन सुझावों पर उनकी क्या राय है।


वाहनों और निर्माण से प्रदूषण पर ध्यान

बेंच ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जांच करने की बात कही है। इस पर विस्तार से सुनवाई 12 मार्च को होगी। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को कम करने के उपायों पर भी चर्चा की गई। अदालत ने पूछा कि निर्माण और तोड़फोड़ से धूल को कैसे रोका जा सकता है।


प्रदूषण का पुराना मुद्दा

दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों में प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। दीवाली से जनवरी तक AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है। सुप्रीम कोर्ट में कई बार इस मुद्दे पर सुनवाई हो चुकी है, लेकिन अब तक बड़े बदलाव नहीं आए हैं। इस बार कोयला आधारित उद्योगों पर ध्यान केंद्रित करने से यह प्रतीत होता है कि लंबे समय के समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।