दिल्ली की राजनीति में नया विवाद: रेखा गुप्ता ने केजरीवाल पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कड़ी प्रतिक्रिया
नई दिल्ली : दिल्ली की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर आरोपों का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शराब नीति मामले में निचली अदालत के निर्णय पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें घड़ियाली आंसू बहाने की आवश्यकता नहीं है। गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अदालत द्वारा 'साक्ष्य के अभाव' की बात करना और पूर्ण रूप से निर्दोष होना, ये दोनों अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने इसे दिल्ली की जनता के साथ विश्वासघात का एक बड़ा उदाहरण बताया।
शराब नीति पर उठाए गए सवाल
मुख्यमंत्री ने केजरीवाल सरकार द्वारा लागू की गई शराब नीति पर सीधा हमला किया। उन्होंने पूछा कि यदि यह नीति वास्तव में इतनी प्रभावी और राजस्व बढ़ाने वाली थी, तो इसे अचानक वापस क्यों लिया गया? सरकार ने पुरानी नीति पर यू-टर्न क्यों लिया? रेखा गुप्ता ने थोक मुनाफे को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने के पीछे की मंशा पर भी सवाल उठाए और पूछा कि इसका असली लाभार्थी कौन था।
मोबाइल फोन बदलने की रहस्य
जांच के दौरान सामने आए चौंकाने वाले तथ्यों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 200 दिनों के भीतर 160 से अधिक मोबाइल फोन बदले गए। उन्होंने सवाल किया कि इतनी बड़ी संख्या में हैंडसेट बदलने की आवश्यकता क्यों थी। यदि छिपाने के लिए कुछ नहीं था, तो डिजिटल रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ क्यों की गई? रेखा गुप्ता ने कहा कि ये परिस्थितियाँ संदेह पैदा करती हैं और पूर्व मुख्यमंत्री को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
जमानत का अर्थ नहीं है 'क्लीन चिट'
रेखा गुप्ता ने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि केवल जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि आपको 'क्लीन चिट' मिल गई है। कानून की तकनीकी भाषा में दोषमुक्ति और जमानत दो अलग चीजें हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उच्च अदालतें उपलब्ध साक्ष्यों की गहराई से जांच करेंगी और अंततः सच्चाई सामने आएगी।
राजस्व का भारी नुकसान
सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली के सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का संभावित राजस्व नुकसान हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पैसा दिल्ली की जनता का है, जिसे गलत नीतियों की भेंट चढ़ाया गया। किसी भी चुनी हुई सरकार के लिए जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है और केजरीवाल सरकार ने उस विश्वास को तोड़ा है। इसलिए, इस वित्तीय अनियमितता के लिए सख्त जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
ईमानदारी के दावों पर कटाक्ष
मुख्यमंत्री ने केजरीवाल के 'कट्टर ईमानदार' होने के दावों पर कटाक्ष किया। उन्होंने पूछा कि यदि वे वास्तव में निर्दोष थे, तो जांच एजेंसियों के समन को बार-बार नजरअंदाज क्यों किया गया? एक सच्चा नेता कानूनी जांच से भागता नहीं है, बल्कि हर सवाल का सामना करता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है और दिल्ली की जनता अपने हितों के साथ खिलवाड़ करने वालों को कभी माफ नहीं करेगी।