दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन में बढ़ता समर्थन और मानवीय पहल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन का नया पहलू
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान एक अनोखी तस्वीर उभरकर सामने आई है। यहां केवल नारेबाजी और विरोध ही नहीं हो रहा, बल्कि विभिन्न राज्यों से भोजन और आवश्यक सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाएं जैसे Swiggy और Zomato के माध्यम से लोग दूर-दूर से प्रदर्शनकारियों के लिए खाना भेज रहे हैं। कई ऑर्डर के साथ शुभकामनाएं और प्रोत्साहन के संदेश भी शामिल हैं, जो इस आंदोलन में लोगों की भागीदारी और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
केरल से भेजा गया प्यार
फूड डिलीवरी कंपनियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर पर ऐसे ऑर्डरों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। कई ऑर्डर किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदर्शन स्थल के लिए भेजे जा रहे हैं। डिलीवरी निर्देशों में यह उल्लेख होता है कि भोजन उन प्रदर्शनकारियों को दिया जाए जिन्होंने अभी तक खाना नहीं खाया है। समोसे, मोमोज़, बर्गर, चावल, पैटीज़ और अन्य खाद्य पदार्थ विभिन्न शहरों से मंगाए जा रहे हैं। कई डिलीवरी पार्टनर्स ने बताया कि उन्होंने एक ही दिन में कई बार प्रदर्शन स्थल पर भोजन पहुंचाया।
स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका
प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में स्वयंसेवक भी भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन कर रहे हैं। कई लोग अपने घरों से खाने के पैकेट और पानी की बोतलें लेकर आ रहे हैं, जिन्हें स्वयंसेवकों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों तक पहुंचाया जा रहा है। कुछ स्वयंसेवक चिकित्सा सहायता, ORS वितरण और जरूरतमंदों की देखभाल में भी लगे हुए हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले के दिनों में भोजन और पानी की कमी थी, लेकिन अब नागरिकों और स्वयंसेवी समूहों के सहयोग से स्थिति में सुधार हुआ है।
सेवा के माध्यम से बढ़ता समर्थन
दिल्ली की कई सामाजिक संस्थाएं और छात्र संगठन इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हो रहे हैं। स्वयंसेवी संस्थाएं प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों के लिए भोजन उपलब्ध करा रही हैं। इसके अलावा छाते, रेनकोट, मच्छरदानी, टॉर्च, ऊर्जा पेय और अन्य आवश्यक सामान भी वितरित किए जा रहे हैं। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि यह सहयोग केवल राहत सामग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देशभर के नागरिकों की एकजुटता और लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रतीक बन गया है। इस मानवीय पहल से यह स्पष्ट होता है कि दूर बैठे लोग भी अपने तरीके से प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।