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दिल्ली में कांग्रेस की महारैली: बीजेपी का तीखा विरोध और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा आयोजित विपक्ष की महारैली ने बीजेपी के साथ राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी का दावा किया गया है। बीजेपी ने इसे 'महाठगों का मेला' करार देते हुए कई आरोप लगाए हैं। रैली के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसमें ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का उपयोग शामिल है। जानें इस सियासी घटनाक्रम के सभी पहलुओं के बारे में।
 

दिल्ली में सियासी टकराव


दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस द्वारा आयोजित विपक्ष की महारैली ने बीजेपी और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। इस प्रदर्शन का आयोजन एसआईआर के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया है। कांग्रेस का दावा है कि इस रैली में लगभग 10 लाख लोग शामिल हुए, जबकि रामलीला मैदान की अधिकतम क्षमता केवल 50 हजार है।


बीजेपी का कड़ा जवाब

बीजेपी ने इस रैली पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे 'महाठगों का मेला' करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह रैली कांग्रेस के लिए अंतिम झटका साबित होगी।


नड्डा के चार आरोप

जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली के पीछे चार मुख्य उद्देश्यों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, पहला उद्देश्य सिख समुदाय के जख्मों पर नमक छिड़कना है, दूसरा त्योहारों के दौरान छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाना, तीसरा देश की छवि को धूमिल करना और चौथा दंगा-फसाद का माहौल बनाना है। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भारत कोई 'बनाना रिपब्लिक' नहीं है।


सोशल मीडिया पर बीजेपी का बयान

बीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विपक्ष की महारैली के खिलाफ पोस्टर जारी किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अफवाहें और अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। बीजेपी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का भी उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।


1984 के दंगों पर बीजेपी का प्रदर्शन

विपक्ष की महारैली के दौरान बीजेपी 1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी प्रदर्शन कर रही है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में बीजेपी का मार्च हरिनगर से शुरू होने की सूचना है। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में सिखों की जान गई थी।


मिंटो रोड पर पोस्टर फाड़ने का विवाद

कांग्रेस का मार्च कनॉट प्लेस से मिंटो रोड होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचने की योजना है। सुबह से ही बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता जुटने लगे हैं। इस दौरान मिंटो रोड पर बीजेपी द्वारा लगाए गए 1984 के दंगों से संबंधित कुछ पोस्टरों को विपक्षी कार्यकर्ताओं द्वारा फाड़ने का आरोप लगाया गया है।


सुरक्षा के कड़े इंतजाम

रैली के आयोजन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। आयोजन स्थल को 14 जोन में विभाजित किया गया है, जहां प्रत्येक जोन की निगरानी एसीपी स्तर के अधिकारियों द्वारा की जाएगी। सुरक्षा के लिए ड्रोन और लगभग 250 सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जा रहा है, और करीब 10 हजार जवानों की तैनाती की गई है।


राजनीतिक माहौल में गर्मी

विपक्ष की महारैली और बीजेपी के प्रदर्शन के चलते राजधानी में राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। एक ओर विपक्ष एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगा रही है।