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दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन: असली स्थिति क्या है?

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की वास्तविकता को समझने की कोशिश की जा रही है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से हो रहा है, लेकिन इसके पीछे की तैयारी मुख्य रूप से लेफ्ट और आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा की जा रही है। इस बार का आंदोलन पहले के प्रदर्शनों से भिन्न है, क्योंकि इसमें पीड़ित पक्ष की भागीदारी नहीं है। जानें इस प्रदर्शन के पीछे की राजनीति और इसके प्रभाव को लेकर क्या है असली स्थिति।
 

प्रदर्शन की वास्तविकता


दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को कॉकरोच जनता पार्टी के नाम से जाना जा रहा है, लेकिन असल में इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है। इस आंदोलन की तैयारी मुख्य रूप से लेफ्ट और आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा की जा रही है। यह ध्यान देने योग्य है कि इस बार का प्रदर्शन जून और जुलाई में हुए प्रदर्शनों से काफी भिन्न है। पहले के समय में, नीट पेपर लीक से प्रभावित 24 लाख छात्र और उनके परिवार इस आंदोलन का हिस्सा बने थे, और हर परिवार की सहानुभूति उस समय के आंदोलन के साथ थी। लेकिन इस बार, यह प्रदर्शन पीड़ित पक्ष का नहीं है, बल्कि एक थर्ड पार्टी द्वारा प्रायोजित है।


इसमें शामिल लोग, जिनके नाम कट गए हैं, सड़क पर बड़ी संख्या में नहीं उतर रहे हैं। यह आंदोलन स्वंयस्फूर्त नहीं है; इसके लिए लोगों को जुटाना पड़ रहा है। अभिजीत दीपके और उनकी चार सदस्यीय टीम के पास न तो कोई संगठन है और न ही कोई अनुभव। यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से कितना धन मिला है, लेकिन यह निश्चित है कि उनके पास कोई संगठित ढांचा नहीं है। जबकि आम लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर प्रदर्शन को संगठित करना बहुत कठिन होता है।


इस कार्य को आम आदमी पार्टी और लेफ्ट पार्टियां कर रही हैं। दिल्ली में लेफ्ट पार्टियों के छात्र संगठनों के पास एक बड़ा कैडर है, और आम आदमी पार्टी के पास संसाधन हैं। उन्हें चार महीने में पंजाब और गोवा के चुनाव भी लड़ने हैं, इसलिए वे अपने संगठन और संसाधनों का उपयोग कर लोगों को जुटा रहे हैं, जबकि सीजेपी को इसका श्रेय मिल रहा है।