×

दिल्ली में ब्रिक्स समिट: वैश्विक राजनीति का नया अध्याय

दिल्ली में ब्रिक्स समिट के आयोजन के साथ, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इस सम्मेलन में वैश्विक नेताओं की उपस्थिति और मीडिया की प्रतिक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं। पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन ने इसे भारत के लिए एक परीक्षा बताया है, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने उभरती शक्तियों की पश्चिम के विकल्प की तलाश पर ध्यान केंद्रित किया है। जानें इस सम्मेलन के पीछे की राजनीति और वैश्विक मुद्दों पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा का कड़ा पहरा

दिल्ली की सड़कों पर आज एक अलग ही चमक देखने को मिल रही है। सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। वीआईपी मूवमेंट के कारण कई मार्गों को बंद कर दिया गया है, जिससे कार्यालय जाने वाले लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने दिल्लीवासियों से सहयोग की अपील की है, क्योंकि यह ब्रिक्स समिट है, जो दुनिया की 40% जीडीपी और आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है। इस बार भारत इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है। वैश्विक राजनीति के इस महत्वपूर्ण क्षण पर विदेशी मीडिया ने इसे चुनौतीपूर्ण बताया है। पड़ोसी देश ने यह सवाल उठाया है कि चीन के साथ संबंध कैसे विकसित होंगे, खासकर शी जिनपिंग के आगमन के संदर्भ में।


दुनिया भर की मीडिया की प्रतिक्रियाएँ

पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन ने एक रिपोर्ट में लिखा है कि भारत के लिए ब्रिक्स समिट की मेज़बानी एक परीक्षा है। शी जिनपिंग का भारत दौरा 2019 के बाद का पहला मौका है, और इसे दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच सामान्यीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन सीमा विवाद और व्यापार घाटा अभी भी समस्याएँ बने हुए हैं।


डॉन की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर युद्ध और आर्थिक संकट का माहौल है। इसमें यह भी बताया गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस बैठक में शामिल होंगे। नई दिल्ली में तिब्बती निर्वासितों ने शी जिनपिंग के दौरे के खिलाफ प्रदर्शन किया।


ईरान के राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है, और यह सम्मेलन पश्चिम एशिया के संघर्ष के बाद आयोजित किया जा रहा है। भारत ने ईरान और इजराइल दोनों के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका के साथ संतुलन बनाए रखने का प्रयास भी जारी है।


न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक लेख में कहा है कि उभरती शक्तियाँ पश्चिम के विकल्प की तलाश कर रही हैं, लेकिन युद्ध की स्थिति उन्हें विभाजित कर रही है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करना है, लेकिन वैश्विक संघर्ष और बढ़ती तेल की कीमतें इस एकता की परीक्षा लेंगी।